स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२८ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
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नास्तिक १९२ परमाणु १८,७०-७१,१५७,१६०
निकाचितकर्म ३१ परमाणुपाकजरूप ६१
निग्रहस्थान ७७ परमेष्ठी (पंच) २६६
—द्वाविंशतिविधम् ८५ परलोक १८०
नित्यानित्यपक्षयोः दूषणानि १५,२७,२३३,२३५ —परलोकनिषेध १९४
—प्रदीपादौ नित्यानित्यत्वसिद्धिः १६-१८ परलोकिन् १८०
—आकाशादौ नित्यानित्यत्वसिद्धिः १८-२० पर्याय २०४
—नित्यलक्षणम् १९ पर्यायास्तिकिनय (पर्यायार्थिकनय) १२०,२०५
—पातंजलयोगप्रशस्तकारमतानुसारेण पशुवध ९१
नित्यानित्यवस्तुकल्पना २१-२२ पातंजलटीकाकार २३९
—एकान्तनित्यानित्यपक्षयोः अर्थक्रियाकारित्वाभावः पारमर्ष (सांख्य) ९२
२२-२६ पितृ ८८,९५,९७
—नित्यानित्यवादिनोः पूर्वपक्षो २३३-२३४ पिण्ड ९७
नित्यशब्दवादिन् १२८ पिशाच १९७,२०९
नित्यपरोक्षज्ञानवादिन् (मीमांसकभट्ट) १०३ पिशाचकी १९७
नियोग १३३ पुराण ९०,१३२
निरन्वयविनाश १५१ पुरोडाश (विप्रेभ्यः) ९१
निर्विकल्प (प्रत्यक्ष) ११४ पुरुष १३८-१३९
निलयन २४३ पुरुषाद्वैत ११७
निशीथचूर्णि ६ पौरुषेय ५,९२,९८
निःश्रेयस १७९ —वेदस्यापौरुषेयत्वखण्डनम् ९८
निस्स्वभावत्व (अनिर्वाच्यत्व) ११२ पंचलिंगीकार ९०
नैगमसंग्रहव्यवहारऋजुसूत्रशब्दसमभिरूढै- प्रकरणसम २९
वंभूताः नयाः २४३-२५२ प्रकृति १३५,१४१
नैयायिक ७७, २४८ प्रज्ञापना २४२
न्यायकुमुदचन्द्रोदय १३४ प्रतिसंक्रम १३९
न्यायतात्पर्यपरिशुद्धि १६९ प्रतिसंचर १४३
न्यायबिन्दुसूत्र १४६ प्रतिसंधेयप्रतिसंधायकभाव १८१
न्यायविन्दुटीका १४६ प्रथमद्वात्रिंशिका (अयोगव्यवच्छेदाभिधान) ९
न्यायभूषणसूत्रकार ८० प्रदीपकलिका १८६
न्यायवार्तिक ७८ प्रदेश ७१,२०१
न्यायावतार २५२ —प्रदेशाष्टकनिश्चलता २०१
प्रमाण ७८,७९,१६९,१७७,२४०,२५१
प —नैयायिकमते प्रमाणलक्षणम् ७९
पतंजलि १३७,१३९ —जैनमते प्रमाणम् २५१,२५२
पदार्थ ४८,५२,५४,५६,७८,८५ —शून्यवादिमते प्रमेयाभावे प्रमाणस्या-
—वैशेषिकमते षट्पदार्थाः ४८-५१ प्यभाव १६९-१७०
—अक्षपादमते षोडशपदार्थाः ७८,८५ प्रमाणफल १४४,१४८
परब्रह्म ११४ —बौद्धमते प्रमाणफलयोरैक्यम् १४८
परमपुरुष ११६ —नैयायिकमते प्रमाणात् प्रमाणफलं भिन्नं १४८