स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary
आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंस्याद्वादमञ्जरीके विशेष शब्दोंकी सूची (६) २५
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अश्वमेध ३८, ८८ इन्द्रभूति (गणधर) २०६
अष्टसमय (केवलिसमुद्घाते) ७५ इन्द्रिय (एकादश) १३६
अष्टादश (दोष) ३ ईश्वर २८-४१, ६९-७०
असत्यामृषा (भाषा) ९३ —कर्ता २८,२९, ३१-३३
अहंकार १३५ —एक २९-३४
अर्हत् २६५ —सर्वव्यापक ३०, ३४-३६
—सर्वज्ञ ३०, ३७-३९
आ —स्ववश ३०,३९
आकर्षण ६८ —नित्य ३०, ४०-४१
आगम २९,३७,३८,६२,९१,९८,१००,१७५,२०७ ईश्वरकृष्ण १३६
२५२,२६२
आचारांग १७४ उ
आजीविक ३ उच्चाटन ६८
आत्मग्रह्म १११ उत्पादव्ययध्रौव्य १५, १८, १९, २१, १९८-२००
आत्मा (चेतन-क्षेत्रज्ञ-जीव-पुद्गल) १७५ उत्पत्ति (ज्ञानस्य) १०४
—आत्मज्ञानसंबंध ५२,५३,५६,६० उदयन (प्रामाणिकप्रकाण्ड) ५१, १६९
—आत्मविभुत्व ६६-७४ उदयप्रभसूरि २,२७०
—आत्मबहुत्व ६९ उपयोग ५९, १०६, १७३
—आत्मसिद्धिः १७२-१७६ —उपयोगलक्षण आत्मा ५९, १७३
—आत्मनः कथंचित् पौद्गलिकत्वं १२८ —लब्ध्युपयोगलक्षण भावेन्द्रिय १०६
—बौद्धमते आत्मा १८० उपवास १३२
—चार्वाकमते आत्मानिषेध १९६ उपशान्तमोहगुणस्थान ६
आद्यकर्म ७० उपादानोपादेयभाव १५१
आधाकर्म ९९ उपाधि २२४
आप्त (सर्वज्ञ) ७, ८, १७५ —औपाधिक ५२
—सर्वज्ञसिद्धिः १७६ ऊ
आप्तवचन २५२
आयुर्वेद १०० ऊर्मिषटक ५४
आर २ ए
आर्तध्यान ८९
आर्हतीकृत २ एकादशी १३२
आलयविज्ञान (वासना) १८९ एकान्तवाद २२-२४, २३६-२४०
आवश्यकभाष्य २४२ —नित्यैकान्तपक्षे दूषणम् २२-२४, २३६-२३७
आश्विनमास १३२ —अनित्यैकान्तपक्षे दूषणम् २५-२८,२३७-२४०
आसुरि १३७ एकेन्द्रिय १७४
इ औ
इज्याध्ययनदानादि २०७ औत्सर्गमार्ग (सामान्यविधि) ९९
इतरेतराश्रय ३३, ४१ औदारिकशरीर ९५
इतिहास ९० औलूक्यमत १२, ७७