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सर्वकोश
स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

स्याद्वादमञ्जरी (आचार्य मल्लिषेण सूरि - डॉ. जगदीशचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Syadvadamanjari of Mallishena Suri with Hindi Commentary

आचार्य मल्लिषेण सूरि (अनुवादक: डॉ. जगदीशचन्द्र जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished458 पृष्ठ

पृष्ठ 366, कुल 458 में से

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पृष्ठ 366

३१४ श्रीमद्राजचन्द्रजैनशास्त्रमालायां
धर्मोंको तथागतगर्भ कहकर तीर्थिकोंको आकर्षण करनेके लिये उपदेश दिया है । इसीलिये इसमें वोधिसत्त्वों-
को आत्मदृष्टि नहीं करनी चाहिये ।१
असंग, वसुबंधु, नन्द, दिङ्नाग, धर्मपाल, शीलभद्र ये विज्ञानवादके प्रधान आचार्य माने जाते हैं।
असंग ( ४८० ई. ), जिन्हें आर्यसंग भी कहा जाता है, और वसुबंधु दोनों सगे भाई थे। ये पेशावर
( पुरुषपुर ) के रहने वाले ब्राह्मण थे। जीवनके प्रारंभमें वसुबंधु सर्वास्तित्त्ववादका प्रतिपादन करते थे और
अपने जीवनके अंतिम वर्षोंमें अपने बड़े भाई असंगके प्रभावसे विज्ञानवादका प्रतिपादन करने लगे थे। पहले
असंगको विज्ञानवादका प्रतिष्ठाता समझा जाता था, परन्तु अव मैत्रेय ( मैत्रेयनाथ ) ऐतिहासिक व्यक्ति
समझने जाने लगे हैं। मैत्रेय असंगके गुरु थे, और इन्होंने ही योगाचारकी नींव रक्खी। मैत्रेयनाथने सूत्रा-
लंकार, मध्यान्तविभंग, धर्मधर्मताविभंग, महायानउत्तरतन्त्रशास्त्र, अभिसमयालंकारकारिका आदि ग्रंथोंका
निर्माण किया है। असंगने महायानसूत्रालंकार, योगाचारभूमिशास्त्र, महायानसूत्र, पंचभूमि, अभिधर्मसमु-
च्चय, महायानसंग्रह आदि शास्त्र लिखे हैं। वसुबंधुने अभिधर्मकोष, परमार्थसप्तति, विंशतिकाविज्ञप्तिमात्रता-
सिद्धि, त्रिंशिकाविज्ञप्तिमात्रता तथा सद्धर्मपुण्डरीक, प्रज्ञापारमिता आदि महायानसूत्रोंके ऊपर टीकायें लिखीं
disguised return from the theory of a stream of the thought to the doctrine
of substantial soul.
The conception of Buddhist Nirvana, पृ. ३२.
यामाकामी सोगेन ( Yamakami sogen ) ने आलयविज्ञान और आत्माकी तुलना करते
हुए लिखा है—
The Alayavijnana of the Buddhists has its counterpart in the
Atman of the orthodox Hindu system of philosophy, with this difference
that the Atman is immutable while the Alayavijnana is continuously chan-
ging........It might be said to be mutable while the Soul is immutable, but
it may be said to resemble soul in its continuity. Our consciousnesses
are dependent upon the Alayavijnana. They act or stop, but the Alaya-
vijnana is continuously a consciosness. It is universal only in .the sense
that it can go everywhere, while the Atman is said to be present every-
where. The Alayavijnana is said to attain its liberation and amala-
gamate with the ocean of the 'Great Atman' while the Alayavijnana is
the name given to consciousness in the stage of the common people and
of one who has just attained the seventh Bhumi or realm of Bodhisattva.
Systems of Buddhistic Thought
अध्याय. ६, पृ. २११, २३७ ।
१. भगवानाह । न हि महामते तीर्थकरात्मवादतुल्यो मम तथागतगर्भोपदेशः । किंतु महामते तथागताः
शून्यताभूतकोटिनिर्वाणानुत्पादानिमित्ताप्रणिहिताद्यानां महामते पदार्थानां तथागतगर्भोपदेशं कृत्वा
तथागता अर्हन्तः सम्यक्संबुद्धाः बालानां नैरात्म्यसंत्रासपदविवर्जितार्थं निर्विकल्पनिर्राभासगोचरं तथागत-
गर्भमुखोपदेशेन देशयन्ति । न चात्र महामते अनागतप्रत्युत्पन्नैः बोधिसत्त्वैर्महासत्त्वैरात्माभिनिवेशकर्तव्यः ।
........एवं हि महामते तथागतगर्भोपदेशमात्मवादाभिनिविष्टानां तीर्थकराणामाकर्षणार्थं तथागतगर्भो-
पदेशेन निदिशन्ति । लंकावतार पृ. ७७ ।