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स्वदेशी और भारतीयता (धरमपाल एवं राजीव दीक्षित - स्वावलम्बी अर्थनीति एवं ग्राम-स्वराज्य दर्शन)

स्वदेशी और भारतीयता (धरमपाल एवं राजीव दीक्षित - स्वावलम्बी अर्थनीति एवं ग्राम-स्वराज्य दर्शन)

Swadeshi Aur Bhartiyata: Swavalambi Arthniti evam Gram Swarajya Darshan

धरमपाल एवं राजीव दीक्षित विचार पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished50 पृष्ठ

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श्री धर्मपालजी (जन्म-काधला, मुजफ्फरनगर,
१९२२) ने लाहौर में शिक्षा पाने के साथ स्वाधीनता
आन्दोलन में भाग लिया। मीरा बेन द्वारा रुड़की एवं
ऋषिकेश के बीच स्थापित 'पशूलोक' एवं 'बापूग्राम'
से सम्बद्ध रहने के बाद 'एसोसिएशन ऑफ वालण्टरी
आर्गेनाइजेशन्स ऑफ रुरल डेवलपमेण्ट' (अवार्ड,
दिल्ली) के महासचिव और निदेशक (१९५८-
१९६४) रहे। फिर अखिल भारतीय पंचायत परिषद के शोध विभाग का कार्य
देखते (१९६४-६५) रहे। वर्तमान में धर्मपालजी भारतीय इतिहास अनुसंधान
परिषद के सदस्य और राष्ट्रीय गोपशु आयोग के अध्यक्ष हैं।
श्री धर्मपालजी ने गत पचीस-तीस वर्ष अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में
इतिहास द्वारा उपेक्षित भारतीय समाज की शक्तियों-कमियों की खोज करने में
लगाये हैं और देश-विदेश के अभिलेखागारों-ग्रंथागारों से प्रभूत प्रमाण एकत्र किये
हैं जिनसे अंग्रेजी शासन से पूर्व भारतीय समाज की एक ऐसी तस्वीर का पता चलता
है जो आज के भारतीय मन में अंकित तस्वीर के सर्वथा विपरीत है।
श्री धर्मपाल के प्रकाशित ग्रन्थ हैं-
सिविल डिसओबीडिएन्स एण्ड इन्डियन ट्रेडीशन
इण्डियन साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी इन द एटीन्थ सेन्चुरी
डेस्पोलियेशन एण्ड डिफेमिंग ऑफ इण्डिया
द मद्रास पंचायत सिस्टम
द ब्यूटीफुल ट्री
अंग्रेजों से पहले का भारत
भारतीय चित्त, मानस और काल
भारत का स्वधर्म
स्वदेशी और भारतीयता
अंग्रेजी की सभी पुस्तकें अभी हाल में अदर इण्डिया प्रेस, गोवा से पुनः
प्रकाशित हुई हैं। हिन्दी में भी शीघ्र ही प्रकाशित होने जा रही हैं।
: प्रकाशक :


स्वदेशी
और
भारतीयता
धर्मपाल