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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 838 में से

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पृष्ठ 87

६४ सूर्य सिद्धान्त
देर में कुछ आगे बढ़ जायगा । इसलिए पच्छिम के स्थानों के लिए त्रैराशिक द्वारा जो
कुछ आवे वह जोड़ना चाहिये ।
देशान्तर को यदि योजन में न लिख कर घड़ी या अंश में लिखा जाय तो
६०वें श्लोक के नियम का सरल रूप यह होगा :-
६० घड़ी : देशान्तर घड़ी :: ग्रह की दैनिक गति : देशान्तर घड़ी में गति
देशान्तर घड़ी × ग्रह की दैनिक गति
अर्थात् देशान्तर फल = ————————————————— ( ४ )
६० घड़ी
इस एक समीकरण से ६०वें श्लोक के नीचे दिये हुये पहले दो समीकरणों
का काम निकल जायगा और सरलता भी होगी; क्योंकि उन समीकरणों के लिए
देशान्तर घड़ी से ही देशान्तर योजन आगे के ६४-६५ श्लोकों के अनुसार बनाना
पड़ता है । इसलिए सीधी ही क्रिया क्यों न की जाय ?
आगे के श्लोक में यह बतलाया गया है कि मध्यरेखा पर कौन-कौन नगर
पड़ते हैं ।
राक्षसालयदेवौकशशैल्योर्मध्यसूत्रगा ।
रोहीतकमवन्ती च यथा सन्निहितं सरः ॥६२॥
अनुवाद—(६२) राक्षसालय अर्थात् लंका और देवलोक अर्थात् सुमेरु पर्वत
(उत्तरी ध्रुव) के बीच से गयी हुई रेखा पर जो देश हैं जैसे रोहीतक, अवन्ती,
कुरुक्षेत्र इत्यादि (वे मध्य रेखा पर हैं) ॥६२॥
विज्ञान भाष्य—पिछले श्लोक के विज्ञान भाष्य में देशान्तर के सम्बन्ध में
मध्य रेखा की चर्चा अच्छी तरह हुई है। यहाँ इतना कहना और आवश्यक है कि
उज्जैन से होती हुई उत्तर-दक्षिण-रेखा विषुवत् रेखा से जिस स्थान पर मिलती है
उसे ही लंका कहते हैं। ज्योतिष की यह लंका वही लंका है, जिसमें रावण रहता था
अथवा अन्य कल्पित स्थान है और गणित की सुविधा के लिए मान लिया गया है,
यह निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता । कुछ लोग १ वर्तमान सिंहल द्वीप (सीलोन)
को ही रावण की लंका और पोलन नरुआ को रावण की राजधानी कहते हैं और
अनुमान करते हैं कि यह पौलस्त्य-नगर का अपभ्रंश है ।
रोहीतक वर्तमान रोहतक है या इस नाम का कोई और स्थान था यह
विचारणीय है; क्योंकि वर्तमान रोहतक का देशान्तर इंडियन क्रोनोलाजी पृ० १६०
में १६२ सेकंड 'पूर्व' दिया हुआ है, जिससे जान पड़ता है कि रोहतक मध्य रेखा से
१. देखो श्रावण १६८० वि की माधुरी पृष्ठ ६-७ ।