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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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मध्यमाधिकार ५६
चित्र १०
भ = पृथ्वी का केन्द्र ।
उ = पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव (सुमेरु) ।
द = पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव (कुमेरु) ।
व = विषुवत् रेखा का वह विन्दु जो स के ठीक दक्षिण है ।
स = अभीष्ट स्थान; उसवद स स्थान की उत्तर-दक्षिण रेखा ।
∠ व भ स = स का अक्षांश ।
∠ स भ उ = स का लम्बांश ।
उ द = पृथ्वी का अक्ष ।
स भ = स से पृथ्वी के अक्ष की दूरी
= स स्थान की लम्बज्या, सिद्धान्तीय पद्धति से
जैसे-जैसे उत्तर या दक्षिण जाइये तैसे-तैसे स्फुट परिधि कम होती जाती है यहां तक
कि ध्रुवों पर स्फुट परिधि शून्य हो जाती है । इसी तरह अक्षांश बढ़ता जाता है
और लम्बांश कम होता जाता है और ध्रुवों पर अक्षांश ९०° और लम्बांश शून्य
हो जाता है । चित्र से यह भी प्रकट है कि 'स' स्थान की स्फुट परिधि स सा सि की