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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 764

भूगोलाध्याय ७३६
यहाँ २ उ त्र की तुलना में उ२ इतना छोटा है कि नगण्य समझा जा सकता
है क्योंकि त्र पृथ्वी की त्रिज्या है इसलिए यह ३९६० मील के लगभग है और उ
मनुष्य की ऊँचाई है जो १ मील के हज़ारवें भाग के लगभग है, इसलिए यह माना जा
सकता है कि
क्ष२ = २ उ त्र (१)
इस समीकरण में सब नाप मीलों में है। यदि मान लिया जाय कि उ की
नाप फुट में फ हो तो
फ = उ x १७६० x २
या उ =
फ

३ x १७६०
उ का यह मान समीकरण (१) में उत्थापन करने से और त्र की जगह
३९६० रखने से

[चित्र: क, ख, ग, घ, च बिन्दुओं से युक्त वृत्त आरेख]

चित्र १२६