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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 748

भूगोलाध्याय ७२३
आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ही पंचमहाभूत कहते हैं । आकाश में एक
गुण शब्द, वायु में दो गुण शब्द, स्पर्श, अग्नि में तीन गुण शब्द, स्पर्श और रूप; जल
में चार गुण शब्द, स्पर्श, रूप और रस तथा पृथ्वी में पांच गुण शब्द, स्पर्श, रूप, रस
और गंध माने गये हैं इसीलिए २३वें श्लोक के उत्तरार्ध में बतलाया गया है कि एक
एक गुण की वृद्धि से पंचमहाभूतों की उत्पत्ति क्रम से हुई है ।
ब्रह्मांड का वंशवृक्ष
पुरुष ➔ (दोनों स्वयंभू और अनादि) 🡨—प्रकृति (अव्यक्त और सूक्ष्म)
महान् अथवा बुद्धि (व्यक्त और सूक्ष्म)
अहंकार (व्यक्त और सूक्ष्म)
(सात्त्विक सृष्टि अर्थात् व्यक्त और सूक्ष्म इन्द्रियां) (तामस अर्थात् निर्निद्रिय सृष्टि)
पञ्चतन्मात्राएँ (सूक्ष्म)
पांच बुद्धीन्द्रियां पांच कर्मेन्द्रियां मन
पञ्च महाभूत (स्थूल)
पांच ग्रहों की उत्पत्ति—
अग्नीषोमो भानुचन्द्रो ततस्त्वङ्गारकादयः ।
तेजो भूरवाम्बुवातेभ्यः क्रमशः पञ्च जज्ञिरे ॥२४॥
अनुवाद—अग्नि स्वरूप सूर्य और सोम स्वरूप चन्द्रमा की उत्पत्ति के बाद
तेज अर्थात् अग्नि से मंगल, पृथ्वी से बुध, आकाश से बृहस्पति शुक्र और वायु से
शनि उत्पन्न हुए ।
१२ राशियों और २७ नक्षत्रों की उत्पत्ति—
पुनर्द्वादशधाऽऽत्मानं विभजे राशिसंज्ञितम् ।
नक्षत्ररूपिणं भूयः सप्तविंशात्मकं वशी ॥२५॥