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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 715, कुल 838 में से

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पृष्ठ 715

६६० सूर्य-सिद्धान्त
(चंद्रक्रान्तिज्या + सूर्यक्रान्तिज्या ) त्रिज्या
∴ चारि = --------------------------------------------------
लम्बज्या
इसी प्रकार समकोण त्रिभुज शकचा में
चाक शक
----------- = ------------
ज्या चाशक ज्या शचाक
परन्तु कोण शचाक = लम्बांश और कोण चाशक लम्बांश का पूरक है
इसलिए यह अक्षांश के समान हुआ और शक चंद्रमा का शंकु है इसलिए,
शंकु × अक्षज्या
चाक = ----------------
लम्बज्या
यहाँ चाक और चारि के मान कलाओं में हैं क्योंकि भारतीय रीति से ज्या के
मान कलाओं में होते हैं। परन्तु परलेख के लिए नाप अंगुलों में की जाती है इस-
लिए इसको अंगुलों में बदलने के लिए यह मान लेना होगा कि चन्द्रमा का शंकु शक
१२ अंगुल है और इसका तात्कालिक अंगुलात्मक छायाकर्ण त्रिज्या अर्थात् ३४३८ के
समान है। यदि मान लिया जाय कि चारि और चाक के अंगुलात्मक मान क्रमानुसार
त और थ हैं तो नीचे लिखे तीन अनुपात सिद्ध होते हैं—
त्रिज्या शक चारि चाक
---------- = ----- = ------ = -----
छायाकर्ण १२ त थ
१२ × चारि १२ × चारि × छायाकर्ण
∴ त = ------------ = ---------------------------
शक १२ × त्रिज्या
१२ × (चंद्रक्रांतिज्या + सूर्यक्रांतिज्या) त्रिज्या × छायाकर्ण
= -------------------------------------------------------------
१२ × त्रिज्या × लम्बज्या
छायाकर्ण × (चंद्रक्रांतिज्या + सूर्यक्रांतिज्या)
= ------------------------------------------------
लम्बज्या
१२ × चाक १२ × शंकु × अक्षज्या
इसी तरह थ = ----------- = -----------------------
शक शक × लम्बज्या
१२अक्षज्या
= -----------------
लम्बज्या
क्योंकि शक और शंकु एक ही वस्तु है।
यहाँ चंद्रमा और सूर्य की क्रांतिज्याएँ जोड़ी गयी हैं क्योंकि इनकी क्रांतियों
की दिशाएँ भिन्न हैं। यदि दोनों की क्रांतियों की दिशा एक ही हो तो अंतर
निकालना पड़ेगा जैसे यदि सूर्य रा पर हो तो अंतर निकालना पड़ेगा क्योंकि इस
दशा में
करी = चाक - चारी