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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार ६५१
आकाश-गंगा—इस समय उत्तर पश्चिम के कोने से दखिन क्षितिज तक
फैली हुई है। उत्तर-पश्चिम क्षितिज से आरम्भ कर के इसमें या इसके आसपास
कश्यप, पारसीक, प्रजापति, आग्रहायण, लुब्धकं मंडल और नौका पुंज के तारे हैं ।
इन चार मासों के आकाश चित्रों और इनके वर्णनों से आकाश के सभी
सभी प्रधान तारों और तारासमूहों की जानकारी की जा सकती है । इनकी सहायता
से रात्रि में जब आकाश निर्मल हो दिशा, देश और काल का ज्ञान सहज ही हो
सकता है ।
इस प्रकार नक्षत्रग्रहयुत्यधिकार नामक आठवें अध्याय का विज्ञान भाष्य
समाप्त हुआ ।