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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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६३६ सूर्य-सिद्धांत


सौर मासकिस संक्रान्ति से आरम्भ होता हैउस दिन की अङ्ग्रेजी तारीख जिस दिन सौर मास की पहली तारीख मानी गयी हैसौर मास की १ली तारीख के मध्याह्न काल का सूर्य का विषुवांश *नक्षत्र काल † जिस का आकाश चित्र बनाया गया हैसौरमास की १ ली तारीख को आकाश चित्र देखने का समय धूप-घड़ी के अनुसार, मध्याह्नोपरान्तसौर मास की १ ली तारीख का काल-समीकरण
घण्टामिनटघण्टामिनटघण्टामिनट
वैशाखमेष१४ अप्रैल१२६१३३०११५६
ज्येष्ठवृष१५ मई३२७१०१
आषाढ़मिथुन१५ जून५३३७५६

* मध्याह्नकाल में सूर्य का विषुवांश होता है वही मध्याह्न का नक्षत्रकाल भी होता है (देखो पृष्ठ २७५ पाद
टिप्पणी)। यह १६८५ विक्रमीय का प्रयाग के मध्याह्नकाल का विषुवांश है। यह प्रतिवर्ष एक-एक मिनट कम होता जाता है
परन्तु ४ वर्ष के बाद प्रायः यही फिर हो जाता है। परन्तु यह अन्तर नगण्य है।

† नाक्षत्र काल नाक्षत्र-घटिका-यन्त्र से जाना जाता है और जिस समय बसन्त-सम्पात-बिन्दु यामोत्तरवृत्त पर जाता है
उस समय नाक्षत्र दिन का आरम्भ होता है (देखो पृष्ठ ३१७-३६)'