सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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विषुवच्छायाऽभ्यस्ताद्विक्षेपाद्द्वादशोद्धृतात् ।
फलं स्वनतनाडीघ्नं स्वदिनार्धविभाजितम् ॥८॥
लब्धं प्राच्यामृणं सौम्याद्विक्षेपात्पश्चिमे धनम् ।
दक्षिणे प्राक्कपाले स्वं पश्चिमे तु तथा क्षयः ॥६॥
सत्रिभगृहक्रान्तिभागघ्नाः क्षेपलिप्तिकाः ।
विकलास्स्वमृणंक्रान्तिक्षेपयोभिन्नतुल्ययोः ॥१०॥
नक्षत्र ग्रहयोगेषु ग्रहास्तोद्य साधने ।
शृङ्गोन्नतौ तु चन्द्रस्य दृक्कर्मोदाविदं स्मृतम् ॥११॥
तात्कालिकौ पुनः कार्यों विक्षेपौ तु तयोरथ ।
दिक्तुल्यत्वेऽन्तरं भेदे योगश्शेषं ग्रहान्तरम् ॥१२॥
अनुवाद—(७) युक्तिकाल के ग्रहों के दिनमान और रात्रिमान तथा उनके
विक्षेपों का मान जानना चाहिए फिर उस काल में जो राशि पूर्व में लग्न हो उससे
प्रत्येक ग्रह का नतकाल और उन्नतकाल जानना चाहिये । (८) विक्षेप को उस स्थान
की पलभा से गुणा करके १२ से भाग देना चाहिये । जो लब्धि आवे उसको प्रत्येक
ग्रह की नत घड़ी से गुणा करके उसके दिनमान के आधे से और यदि रात्रि हो तो
रात्रिमान के आधे से भाग दे देना चाहिये । (६) अब जो लब्धि आवे उसको यदि
विक्षेप उत्तर हो तो पूर्व कपाल में ग्रह के भोगांश में घटा दो और पच्छिम कपाल में
जोड़ दो । परन्तु यदि विक्षेप दक्षिण हो तो पूर्व कपाल में उस लब्धि को ग्रह के भोगांश
में जोड़ दो और पच्छिम कपाल में घटा दो । (१०) ग्रह के भोगांश में तीन राशि
जोड़कर उसकी क्रान्ति निकालो और इस क्रान्ति के अंश को विक्षेप की कला से गुणा
कर दो, गुणनफल को विकला समझकर ग्रह के भोगांश में जोड़ दो । यदि क्रान्ति और
विक्षेप की दिशाएँ भिन्न हों और यदि इनकी दिशाएँ एक ही हों तो घटा दो । (११)
नक्षत्र और ग्रह के योग में ग्रह का उदय और अस्त साधन करने में, चन्द्रमा का
शृङ्गोन्नत जानने के पहले इस दृक्कर्म का संस्कार करना चाहिये । (१२) दृक्कर्म
संस्कृत ग्रहों का युक्तिकाल और इस समय के इनके विक्षेप फिर निकालकर यदि
विक्षेपों की दिशा एक ही हो तो अन्तर करे और भिन्न हो तो योग करे । ऐसा करने
से जो आवे वही युक्तिकाल में दोनों ग्रहों का परस्पर अंतर होगा ।
विज्ञान भाष्य—युक्तिकाल में ग्रहों के स्थान जानने की जो रीति ३-६
श्लोकों में बतलायी गयी है। उससे यह ज्ञात होता है कि उस समय ग्रह कदम्बप्रोतवृत्त
पर कहां है परन्तु स्पष्ट युक्तिकाल उस समय को कहते हैं जिस समय दोनों ग्रह