सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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इसी प्रकार अन्य ग्रहों के मन्दोच्चों तथा पातों की वार्षिक गति विकला में
जानी जा सकती है।
इस सारिणी के जिन अंकों के पहले धन का चिह्न (+) है उससे यह प्रकट
होता है कि गति पूर्व की ओर है और जिन अङ्कों के पहले ऋण का चिह्न (-) है
उससे प्रकट होता है कि गति पश्चिम की ओर है।
दूसरे स्तम्भ में जो अंक दिये गये हैं वह सायन-मेष के विचार से दिये गये हैं
अर्थात् उनसे यह प्रकट होता है कि सायन-मेष से (वसंत सम्पात से) ग्रहों के मन्दोच्चों
और पातों का अन्तर प्रति वर्ष कितना होता जाता है ।
परन्तु सायन-मेष चल है। यह प्रति वर्ष ५०·२६ विकला पच्छिम की ओर
हटता जाता है; इसलिए यदि निरयन-मेष से जो स्थिर है मन्दोच्चों और पातों का
वार्षिक अन्तर जानना हो तो दूसरे स्तम्भ के अंकों से ५०.२६ विकला घटा देना
चाहिये । ऐसा करने से जो अन्तर आवेंगे वह निरयन-मेष से मन्दोच्चों और पातों के
वार्षिक अन्तर होंगे। ऐसा करने से देखा जाता है कि शुक्र के मन्दोच्च की गति
पश्चिम की ओर है अर्थात् शुक्र का मन्दोच्च तारों के मध्य पूर्व न जाकर पश्चिम
की ओर खिसक रहा है। हमारे व्यावहारिक ज्योतिष ग्रन्थों में अयन चलन ६०
विकला माना गया है। क्योंकि हमारा वर्षमान वास्तविक नाक्षत्र-वर्ष से ८॥ विकला
अधिक है; इसलिए यदि वसंत सम्पात की वार्षिक गति ६० विकला मानी जाय और
दूसरे स्तम्भ में जो अंक दिये गये हैं उनमें से ६० विकला घटायी जाय तो जो
अन्तर आता है वही चौथे स्तम्भ में लिखा गया है। इस स्तम्भ में जो अंक आये हैं
उनकी तुलना सूर्य सिद्धान्तीय अङ्कों से करनी चाहिये ।
मन्दोच्चों और पातों की वार्षिक गति
ग्रह आधुनिक सूक्ष्म* बेधों के अनुसार
सायन-मेष वास्तविक हमारे सिद्धा- सूर्य सिद्धान्त के
या वसंत निरयन- न्तों के अनुसार
संपात से मेष से निरयन-मेष से
१ २ ३ ४ ५
मन्दोच्च विकला विकला विकला विकला
रवि +६१.५ +११.२४ +१.५ +०.११६१
मंगल +६५.७ +१५.४६ +५.७ +०.०६१२
*Loomis की Practical Astronomy से लिया गया
भारतीय ज्योतिः शास्त्र पृष्ठ २०७
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