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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 557

५३२ सूर्य-सिद्धान्त
से ख वि का मान सीधे ही निकालना उचित होगा। यहाँ ख वि वित्रिभ लग्न या
त्रिभोन लग्न का नतांश है, म ख मध्य लग्न का नतांश है और म वि मध्य लग्न और
त्रिभोन लग्न का अन्तर है जो ३१४°४३′ - ३०२°३′ अथवा १२°४०′ के समान
है और $\angle$ म वि ख = ९०°, इसलिए नेपियर के दूसरे नियम के अनुसार,
कोज्या म ख = कोज्या ख वि + कोज्या म वि
$\because$ कोज्या ख वि = $\frac{कोज्या म ख}{कोज्या म वि}$ = $\frac{कोज्या ४५^\circ३′}{कोज्या १२^\circ४०′}$
$\therefore$ लरि कोज्या ख वि = लरि कोज्या ४५°३′ - लरि कोज्या १२°४०′
= ६̅.८४६१ - ६̅.६८६३ = ६̅.८५६८
$\therefore$ ख वि = ४३°३६′
$\therefore$ त्रिभोन लग्न का नतांश = ४३°३६′
यह जानने की दूसरी रीति भी है जो उसी गोलीय त्रिभुज के $\angle$ म वि ख
और म ख की सहायता से नेपियर के दूसरे नियम पर आश्रित है। दोनों रीतियों से
त्रिभोन लग्न का नतांश अभिन्न होता है। इसलिए सूर्य-सिद्धान्त के पृष्ठ ४१३ में
बतलायी गयी रीति की अपेक्षा यही मान्य होनी चाहिए।
दृक्क्षेप = त्रिभोन लग्न की नतांश ज्या = ज्या ४३°३६′ = .६८६६
दृग्गति = त्रिभोन लग्न की उन्नतांश ज्या = कोज्या ४३°३६′ = .७२४२
छेद = $\frac{१}{४ दृग्गति}$ = $\frac{१}{४ \times .७२४२}$
अमान्तकालिक त्रिभोन लग्न = ३१४°४३′ (पृष्ठ ५३०)
अमान्तकालिक सायन सूर्य = २६३°१४′ (पृष्ठ ५२४)
$\therefore$ अमान्त कालिक विश्लेषांश = २१°२६′
$\therefore$ सूर्य या चन्द्रमा का लंबन = $\frac{ज्या विश्लेषांश}{छेद}$
= ४ $\times$ .७२४२ $\times$ ज्या २१°२६′
= ४ $\times$ .७२४२ $\times$ .३६६२
= १.०६०८ घड़ी
= १ घड़ी ३.६५ पल
यह पच्छिम लम्बन है क्योंकि त्रिभोन लग्न से सूर्य पच्छिम है। इसलिए इसको
अमावश्यान्त काल में जोड़ने पर भोगांश-लंबन-संस्कृत-अमावश्यान्त काल आवेगा।
सूर्योदय से अमावश्यान्त का समय = १४ घड़ी ४५ पल
पच्छिम भोगांश लंबन = १ घड़ी ३.६ पल