सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूर्यग्रहणाधिकार ५२६
विषुवकाल से उदयलग्न और अग्रा जानना—अब यह जानना है कि
जब विषुवकाल ३४°१६' है तब उदयलग्न का सायन भोगांश क्या है ? यह चित्र
६० की सहायता से सहज ही जाना जा सकता है जहाँ व पू = ३४°१६, ∠ का व
पू = परमक्रान्ति = २३°२७' और ∠ व पू का = १८०° — ∠ व पू द = १८०° —
लम्बांश = १८०° — ६४°४०' = ११५°२०'
यदि गोलीय त्रिभुज के तीन कोण अ, इ, उ अक्षरों से और इनके सामने के
भुज क्रमशः आ, ई, ऊ अक्षरों से प्रकट किये जाँय तो गोलीय त्रिकोणमिति के दो
सूत्र१ इस प्रकार प्रकट किये जा सकते हैं :—
स्परे १/२ (आ + ई) = [कोज्या १/२ (आ - इ) / कोज्या १/२ (आ + इ)] × स्परे ऊ/२
स्परे १/२ (आ - ई) = [ज्या १/२ (अ - इ) / ज्या १/२ (अ + इ)] × स्परे ऊ/२
इन दोनों सूत्रों के सहारे से आ और ई दोनों के मान जाने जा सकते हैं।
इस प्रकार चित्र ६० के गोलीय त्रिभुज व पू का से
स्परे १/२ (व का + का पू) = [कोज्या १/२ (∠ व पू का - ∠ का व पू) / कोज्या १/२ (∠ व पू का + ∠ का व पू)] × स्परे (व पू)/२
= [कोज्या १/२ (११५°२०' - २३°२७') / कोज्या १/२ (११५°२०' + २३°२७')] × स्परे (३४°१६')/२
= [कोज्या ४५°५६'·५ / कोज्या ६९°२३'·५] × स्परे १७°८'·५
∵ लरिस्परे १/२ (व का + का पू) = लरि कोज्या ४५°५६'·५ +
लरि स्परे १७°८'·५
— लरि कोज्या ६९°२३'·५
= ६·८४२२ + ६·४८८६ — ६·५४६४
= ६.७८५४
∴ (व का + का पू) / २ = ३१°२३'
१. देखो Todhunter और Leathem की Spherical Trigonometry
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