सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रग्रहणाधिकार ५०५.
मोक्षकालीन चंद्रमा का भोगांश = २६६° ३८' · ५
अयनांश = २२° ४०'
चंद्रमा का सायन भोगांश = ३२२° १८' · ५
इसमें ६०° जोड़ने से सायन भोगांश ५२° १८' · ५ होगा जिसकी क्रान्ति
उत्तर होती है ।
इसलिए आयनवलन उत्तर होगा ।
ज्या २३° २७' कोज्या ३२२° १८' · ५
ज्या ( आयनवलन ) = -----------------------------------------
कोज्या १४° २'
·३६७६ X कोज्या ३७° ४१' · ५
= ---------------------------
·६७०२
·३६७६ X ·७६१३
= --------------
·६७०२
·३१४६
= ------
·६७०२
= ·३२४६
∵ आयनवलन = १८° ५६' उत्तर
∵ स्फुटवलन = - २२° ५५' + १८° ५६'
= ३° ५६' दक्षिण
इसी प्रकार सम्मीलन, मध्य और उन्मीलन कालों के स्फुटवलन जाने जा
सकते हैं ।
स्फुटवलनों और ग्रह बिम्बों के अंगुलात्मक मान जानने का जो नियम २६वें
श्लोक में बतलाया गया है उसकी आवश्यकता परिलेखाधिकार में पड़ेगी इसलिए
वहीं इसका उदाहरण भी दिया जायगा ।
इस प्रकार चन्द्रग्रहणाधिकार नामक चौथे अधिकार का विज्ञानभाष्य समाप्त
हुआ ।
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