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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 527

५०२ सूर्य-सिद्धान्त
स्थित्यर्ध ४ घड़ी ४२ पल में सूर्य की गति = ४′·५
∴ मोक्षकालिक सूर्य का भोगांश = ११८°३८′·५
सूर्य से भूभाकेन्द्र का अंतर = १८०°
∴ मोक्षकालिक भूभाकेन्द्र का भोगांश = २९८°३८′·५
,, चंद्रमा का भोगांश = २९६°३८′·५
,, भूभाकेन्द्र से चन्द्रमा का अंतर } १°
पूर्व की ओर
इसके उदयासु भी पूर्ववत् ६० असु होंगे ।
मोक्षकालिक भूभाकेन्द्र का पच्छिम नतकाल = ३२८२ असु
भूभाकेन्द्र से चंद्रमा का अंतर पूर्व की ओर = ६० असु
—————————
∴ मोक्षकालिक चंद्रमा का नतकाल ३२२२ असु
= ३२२२′
= ५३°४२′
चंद्रमा की स्पर्शकालीन चर ज्या = स्परे २५°२०′ x स्परे १४°३१′·४
= ·४७३४ x ·२५६०
= ·१२२६
∴ स्पर्शकालीन चरांश = ७°२′
पृष्ठ २६२ के समीकरण (ग) के अनुसार,
नतांश कोटिज्या = (कोज्या ४२′ - ज्या ७°२′) कोज्या २५°२०′ कोज्या
१४°३१′·४
= (·६६६६ - ·१२२६) x ·६०३८ x ·६८०६
= ·८७७३ x ·६०३८ x ·६६८
= ·७६७५
∴ स्पर्शकालीन नतांश = ३६°५३′
पृष्ठ २७६ के अनुसार,
ज्या अग्रा = ज्या १४°३१′४ / (ज्या ३६°५३′ x कोज्या २५°२०′)

  • को स्परे ३६°५३′ x स्परे २५°२०′
    = ·२५०८ / (·६४१२ x ·६०३८) + १·१६६७ x ·४७३४
    = ·४३२८ + ·५६६५