सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
पृष्ठ 521, कुल 838 में से
संदर्भ में पढ़ें४९६
सूर्य-सिद्धान्त
इसलिए पूर्णिमान्तकालिक चन्द्र शर भी ८'.७६ ही हुआ । चन्द्र शर के इसी
मान को मानैक्य खंड और मानान्तर-खंड के साथ रख कर गणना करने से पहले
की तरह
ग्रास का परिमाण = ६०'·६३ - ८'·७६ = ५१'·८७
स्थित्यर्ध = ६० घड़ी × √{ (६०.६३ + ८.७६)(६०.६३ - ८.७६) } / ७६५.५
= ६० × √{ ६६.३६ × ५१.८७ } / ७६५.५ घड़ी
= ६० × ५६.६६ / ७६५.५ घड़ी
= ४ घड़ी ४२ पल
इसलिए ग्रहण स्थिति काल = ६ घड़ी २४ पल
विमर्दार्ध = ६० घड़ी × √{ (२७.३१ + ८.७६)(२७.३१ - ८.७६) } / ७६५.५
= ६० × √{ ३६.०७ × १८.५५ } / ७६५.५ घड़ी
= ६० × २५.८६७ / ७६५.५ घड़ी
= २ घड़ी १.६५ पल
इसलिए विमर्द अथवा सर्वग्रास स्थिति काल = ४ घड़ी ३ पल के लगभग
घ. पल
पूर्णिमान्त काल = ३ २३ मध्यरात्रि के उपरान्त
स्थित्यर्ध घटाया - ४ ४२
स्पर्श काल - १ १६
ऋण चिह्न प्रकट करता है कि १ घड़ी १६ पल मध्यरात्रि से पहले का समय है ।
पहले लिखे हुए सब संस्कार संक्षेप में यों लिखे जाते हैं :-
घड़ी पल
स्पर्श काल - १ १६
काशी का देशान्तर + १ १३