सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 417, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 417

३६४ सूर्य-सिद्धान्त
और ज्या लि = त्र/क
इसलिए ज्या लि = त्र/त ज्या ल
यदि त को १ मान लिया जाय तो
ज्या लि = त्र ज्या ल (७)
इसका अर्थ यह हुआ कि यदि निरक्ष देशीय पृथ्वी की त्रिज्या १ मान ली
जाय तो चन्द्रमा के निरक्ष देशीय क्षितिज लम्बन की ज्या को किसी स्थान की त्रिज्या
से गुणा कर देने पर उस स्थान का क्षितिज लम्बन ज्ञात हो जायगा ।
उदाहरण २—यदि चंद्रमा का निरक्ष देशीय क्षितिज लंबन ५३' हो तो
देहरादून में क्षितिज लम्बन क्या होगा ?
ऊर्ध्व रेखा का कोण उदाहरण (१) में जान लिया गया है । इसलिए पहले
देहरादून की त्रिज्या सूत्र (६) से जानना चाहिए :—
त्र² = कोज्या अ / [कोज्या आ कोज्या (आ - अ)]
= कोज्या ३०° १८' ५२" / [कोज्या ३०° ८' ४०" कोज्या १०' १२"]
∴ २ लरि त्र = लरि कोज्या ३०° १८' ५२" — लरि कोज्या ३०° ८' ४०"
— लरि कोज्या १०' १२"
= ६.६३६१ - .६.६३६६ - १०
= १̅.६६६२
∴ लरि त्र = १̅.६६६६
∴ त्र = .६६६
∴ देहरादून के क्षितिज लंबन की ज्या
= .६६६ × ज्या ५३'
= .६६६ × ०१५४
= .०१५३८
∴ देहरादून का क्षितिज लंबन = ५२' ५६"*

  • ऐसी सूक्ष्म गणना के लिए लघुरिक्थों की सारिणी कम से कम दशमलव के
    सात अंकों की होनी चाहिए नहीं तो बहुत स्थूलता रह जाती है ।