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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 411, कुल 838 में से

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पृष्ठ 411

३८८ सूर्य-सिद्धान्त

  • उदाहरण १—यदि शुक्र का क्षितिज लंबन ३०″ हो तो जिस समय
    इसका यथार्थ नतांश ६०° होगा उस समय इसका लंबन क्या होगा ?
    ला = ल ज्या न
    = ३०″ X ज्या ६०°
    = ३०″ X .८६६
    = २५″.९८
    उदाहरण २—यदि सूर्य का क्षितिज लम्बन ८″.६ हो तो जिस समय
    इसका यथार्थ उन्नतांश १६° होगा उस समय इसका लम्बन क्या होगा ?
    सूर्य का यथार्थ नतांश = ९०° - १६° = ७४°
    ला = ल ज्या न
    = ८″.६ X ज्या ७४°
    = ८″.६ X .९६१३
    = ८″.२७
    उदाहरण ३—यदि चन्द्रमा का क्षितिज लम्बन ६०′ ४१″.५ हो तो उसका
    लम्बन क्या है जब कि उसका स्पष्ट नतांश ८०° १६′ १६″ हो ?
    यहाँ चन्द्रमा का स्पष्ट नतांश दिया हुआ है इसलिए पहले सूत्र से काम
    लेना होगा । इसलिए
    ज्या ला = ज्या ल X ज्या ना
    = ज्या ६०′ ४१″.५ X ज्या ८०° १६′ १६″
    गुणा भाग की क्रिया को कम करने के लिए इन कोणों की लघुरिक्थ सम्बन्धी
    ज्या (logarithmic sines) से काम लेना अच्छा होगा । लघुरिक्थ सम्बन्धी ज्या,
    कोज्या, स्पर्शरेखा को संक्षेप में लरि ज्या, लरि कोज्या और लरि स्परे लिखा जायगा ।
    लरि ज्या ६०′ ४१″.५ = ८.२४६८३३
    लरि ज्या ८०° १६′ १६″ = ९.९९३७७५
    योग = ८.२४०६०८
    ∴ लरि ज्या ला = ८.२४०६०८
    और ला = ५६′ ४६″.६७
    उदाहरण ४—यदि चन्द्रमा का क्षितिज लम्बन ६०′ ४१″.५ हो और
    उसका यथार्थ नतांश ७६° १६′ २६″.३३ हो तो उसका लम्बन क्या होगा ?
  • लम्बन के सम्बन्ध में जितने उदाहरण लिखे गये हैं वे सब Loomi's
    Practical Astronomy से लिये गये हैं ।