सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३८३
किसी स्थान से देखने पर उन स्थानों में कुछ अन्तर देख पड़ता है । यदि भूतल के
किसी दो स्थानों से दो द्रष्टा चन्द्रमा को एक ही क्षण में देखें तो वह एक ही दिशा
में नहीं देख पड़ता । इसलिए यह जानना आवश्यक है कि किस स्थान से देखने पर
आकाशीय पिण्ड यथार्थ स्थान से कितने अंतर पर देख पड़ता है । भूकेन्द्र और भूतल
के किसी स्थान से देखने पर आकाशीय पिण्ड की दिशाओं में जो अन्तर देख पड़ता है
उसे लंबन कहते हैं ।
चित्र ७४
चित्र ७४ में भ पृथ्वी का केन्द्र या भूकेन्द्र है, द भूतल का एक स्थान जहाँ
द्रष्टा चंद्रमा च को देख रहा है । भ द ख ऊर्ध्व रेखा है जो द स्थान के खस्वस्तिक
ख तक जाती है । द स्थान से द्रष्टा को चन्द्रमा द च ज दिशा में देख पड़ेगा और
भूकेन्द्र भ से चन्द्रमा भ च छ दिशा में देख पड़ेगा । इन दिशाओं में जो अंतर है वह
कोण भ च द के समान है । यही द स्थान से चन्द्रमा का लंबन है ।
द से चन्द्रमा का नतांश कोण ख द च के समान है जिसे चन्द्रमा का स्पष्ट
नतांश कहते हैं । भ से चन्द्रमा का नतांश कोण ख भ च के समान है जिसे चन्द्रमा
का यथार्थ नतांश कहा जाता है । चित्र से यह सिद्ध है कि चन्द्रमा का स्पष्ट नतांश
चन्द्रमा का यथार्थ नतांश + लम्बन ।
यह स्पष्ट है कि लम्बन के कारण चन्द्रमा का स्पष्ट नतांश यथार्थ नतांश से
अधिक हो जाता है इसलिए चन्द्रमा का उन्नतांश उतना ही कम हो जाता है । इस