सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३५७
$\therefore$ क्रान्ति = १४°१२'
सूर्य का सयन भोगांश ६ राशि से अधिक है, इसलिए यह दक्षिण क्रान्ति है ।
चर ज्या = स्परे अक्षांश $\times$ स्परे क्रान्ति
= स्परे २५°२५' $\times$ स्परे १४°१२'
= .४७५२ $\times$ .२५३०
= .१२०२
$\because$ चरांश = ६°५४'
$\because$ चर पल = ६१ पल
= २७ मिनट ३६ सेकंड
क्रान्ति दक्षिण है इसलिए धूपघड़ी में ६ बज कर २७ मिनट ३६* सेकंड पर
प्रयाग में सूर्य का उदय होगा । परन्तु इस दिन काल समीकरण - १६ मिनट है ।
इसलिए सूर्योदय काल में प्रयाग का मध्यम काल = ६ बजकर २७ मिनट ३६
सेकंड - १६ मिनट = ६ बजकर ११ मिनट ३६ सेकंड
प्रयाग के सूर्योदय काल में भारतवर्ष का मध्यम काल क्या होगा यह जानने के
लिए २ मिनट १६ सेकंड और जोड़ना होगा क्योंकि प्रयाग २ मिनट १६ सेकंड
पच्छिम है इसलिए यहाँ का मध्यम या स्पष्टकाल भारतवर्ष के मध्यम काल से इतना
ही पीछे होगा, इसलिए प्रयाग में सूर्योदय के समय रेल की घड़ी में ६ बजकर १३
मिनट ३५ सेकंड हुआ रहेगा ।
सूर्योदय से मध्यम मध्यान्ह काल १२ घंटा - ६ घंटा १३ मिनट ३५ सेकंड
अथवा ५ घंटा ४६ मिनट २५ सेकंड पर होता है और संध्या के ५ बजकर २४ मिनट
तक ११ घंटा १० मिनट २५ सेकंड होता है । यह २७ घड़ी ५६ पल के समान है ।
इसलिए इष्टकाल में सूर्योदयोपरान्त २७ घड़ी ५६ पल है । यह मध्यम सावन काल
है । इसको नाक्षत्र काल में बदल कर लग्न जानने में सुविधा होगी ।
६ सावन घड़ी = ६ नाक्षत्र घड़ी + १ नाक्षत्र पल (पृष्ठ ३२६)
$\because$ २८ सावन घड़ी = २८ नाक्षत्र घड़ी + ५ नाक्षत्र पल
$\because$ २७ घड़ी ५६ पल (सावन)
= २७ घड़ी ५६ पल + ५ पल (नाक्षत्र)
= २८ घड़ी १ पल (नाक्षत्र)
- वर्तन (Refraction of light) के कारण सूर्योदय इससे भी कुछ पहले
होता है जिसकी चर्चा आगे की जायगी ।