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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 368

विप्रश्नाधिकार ३४५
$+\frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या [ ४ भा + ८ च ज्या (भा - नी) ]$
इसमें से चौथा पद
$= -स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा \times कोज्या [ ४ च ज्या (भा - नी) ]$
$\qquad\quad + कोज्या २ भा \times ज्या [ ४ च ज्या (भा - नी) ] }$
$= -स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा + कोज्या २ भा \times ४ च ज्या (भा - नी) }$
क्योंकि ४ च ज्या (भा - नी) बहुत छोटा कोण है इसलिए इसकी कोटिज्या
एक के समान होगी और इसकी ज्या इसी के समान होगी । (देखो Hall and
Knight's Trigonometry पृष्ठ २६२)
इसी प्रकार पाँचवां पद
$= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} { ज्या ४ भा \times कोज्या [ ८ चज्या (भा - नी) ]$
$\qquad\quad + कोज्या ४ भा \times ज्या [ ८ च ज्या (भा - नी) ] }$
$= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} { ज्या ४ भा + कोज्या ४ भा \times ८ च ज्या (भा - नी) }$
$= \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या ४ भा$
क्योंकि इसके दूसरे पद का गुणक .०००१ से भी कम है इसलिए
व $= भा + २ चज्या (भा - नी) + \frac{५}{४} च^२ ज्या २ (भा - नी)$
$\quad - स्परे^२ \frac{क}{२} { ज्या २ भा + ४ चज्या (भा - नी) \times कोज्या २ भा }$
$\quad + \frac{१}{२} स्परे^४ \frac{क}{२} ज्या ४ भा\cdots \hfill (५)$
परन्तु २ ज्या भा $-$ नी) $\times$ कोज्या २ भा
$\quad = ज्या (भा - नी + २ भा) + ज्या (भा - नी - २ भा)$
$\quad = ज्या (३ भा - नी) - ज्या (भा + नी)$
इसलिए यदि समीकरण (५) सरल किया जाय और इसके पद बड़ाई छुटाई
के अनुसार क्रम से लिखे जायें तो
$\quadव = भा + २च ज्या (भा - नी) - स्परे^२ \frac{क}{२} [ ज्या २ भा ]$