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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 330

त्रिप्रश्नाधिकार ३०७
$\because$ सायन वृष के उदयासु $= ३४६६ - १६७५$
$= १७६४$
और मिथुन के उदयासु $= ५४०० - ३४६६$
$= १६३१$
नेपियर के पहले नियम के आधार पर सायन मेष के उदयासु इस समीकरण
से भी ज्ञात हो सकते हैं।
विषुवांश की स्पर्शरेखा $= \frac{कोज्या २३^\circ २७'}{कोस्परे ३०^\circ}$
$= \frac{.६१७५}{१.७३२१}$
$= .५२६७$
$\because$ विषुवांश $= २७^\circ १४'.५ = १६७४.५$
$\because$ सायन मेष के उदयासु $= १६७४.५$
सायनमेष और वृष के विषुवांश की स्पर्शरेखा
$= \frac{कोज्या २३^\circ २७'}{कोस्परे ६०^\circ}$
$= \frac{.६१७५}{.५७७४} = १.५८६०$
$\because$ विषुवांश $= ५७^\circ ४६'$
$\because$ सायनवृष के उदयासु $= ३४४६ - १६७४.५$
$= १७६४.५$
परन्तु उन कोणों या धनुओं की स्पर्शरेखाओं के मान सूक्ष्मतापूर्वक नहीं
निकल सकते जो ६०° से अधिक हैं इसलिए यह रीति व्यापक नहीं है।
इस प्रकार लंका में मेषादि तीन सायन राशियों के उदयकाल यह हुए :-

सायन राशियांप्राचीन रीति से: असुओं मेंप्राचीन रीति से: पलों मेंप्राचीन रीति से: मिनटों मेंनवीन बेधों के अनुसार: असुओं मेंनवीन बेधों के अनुसार: पलों मेंनवीन बेधों के अनुसार: मिनटों में
मेष१६७०२७८११११६७५२७६१११.७
वृष१७६५२६६१२०१७६४२६६११६.६
मिथुन१६३५३२३१२६१६३१३२२१२८.७