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सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 326, कुल 838 में से

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पृष्ठ 326

त्रिप्रश्नाधिकार ३०३
परन्तु कोण व उ का = धनु व पू
∵ ज्या (उ का) / ज्या (उ व का) = ज्या (व का) / ज्या (व पू)
∴ ज्या (व पू) = ज्या (व का) × ज्या (उ व का) / ज्या (उ का)
परन्तु व का = 'का' का सायन भोगांश
∠ उ व का = ∠ उ व पू - ∠ का व पू
= ९०° - सूर्य की परम क्रान्ति
∴ ज्या (उ व का) = सूर्य की परम क्रान्ति कोटिज्या
= २४° की कोटिज्या (सिद्धान्तीय मत से)
= तीन राशि की द्युज्या (पृष्ठ २०८)
ज्या (उ का) = ज्या (उ पू - का पू)
= ज्या (९०° - 'का' की क्रान्ति)
= 'का' की क्रान्ति कोटिज्या
= 'का' की द्युज्या
इसलिए, ज्या (व पू)
= 'का' के भोगांश की ज्या × परम क्रान्ति कोटिज्या / 'का' की क्रान्ति कोटिज्या
इससे व पू का जो मान कलाओं में आवेगा वही असुओं में 'का' के भोगांश
का उदय काल होगा । इस साधारण समीकरण में 'का' के भोगांश की जगह जो धनु
रखा जायगा उसी के लंका के उदयासु ज्ञात हो जायेंगे । यदि इसकी जगह ३०°,
६०° और ९०° रखे जायें तो ३०, ६० और ९० अंशों के भोगांशों के उदयासु अर्थात्
सायन मेष राशि, सायन मेष और वृष राशि तथा सायन मेष, वृष और मिथुन
राशियों के उदयासु क्रम से आ जायेंगे । सायन मेष और वृष राशियों के उदयासुओं
में से सायन मेष राशि के उदयासु घटाये जायें तो सायन वृष राशि के उदयासु और
सायन मेष वृष और मिथुन राशियों के उदयासुओं में से सायन मेष और वृष के
उदयासु घटाये जायें तो सायन मिथुन के उदयासु प्राप्त होंगे ।
यदि समीकरण (१) में 'का' का भोगांश ९०° हो तो 'का' की क्रान्ति सूर्य
की परम क्रान्ति होगी । ऐसी दशा में 'का' के भोगांश की ज्या का मान सिद्धान्तीय
रीति से ३४३८ कला और आधुनिक रीति से १ होगा । इसलिये 'का' की क्रान्ति
कोटिज्या परम-क्रान्ति-कोटिज्या के समान होने से समीकरण का दाहना पक्ष ३४३८
या १ के समान होगा जिससे व पू का मान भी ९०° के समान होगा । इसका अर्थ