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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 317

२६४ सूर्य-सिद्धान्त
∴ पहली दशा में छाया = दृग्ज्या × १२
————————
शंकु
= २६३४ × १२
————————
२२०६
= १४·३१ अंगुल
दूसरी दशा में दृग्ज्या = √ त्रिज्या² — १४४४²
= √ ११८१६८४१ — २०८५१३६
= ३१२०
∴ दूसरी दशा में छाया = ३१२० × १२
————————
१४४४
= २५·६३ अंगुल
नवीन रीति से—
समीकरण (ख) के आधार पर,
नतांश कोटिज्या = ( नतकोटिज्या ∓ चरज्या ) × अक्षकोटिज्या × क्रान्ति-
कोटिज्या
परन्तु चरज्या = स्परे क्रान्ति × स्परे अक्षांश [देखो पृष्ठ २०६
= स्परे १५° × स्परे २५° २५'
= ·२६७६ × ·४७५२
= ·१२७३
∴ नतांश कोटिज्या
= (कोज्या ५२° ३०' ∓ ·१२७३) × कोज्या २५° २५' कोज्या १५°
= (·६०८८ ∓ ·१२७३) × ·६०३२ × ·६६५६
= ·७३६१ × ·६०३२ × ·६६५६ या ·४८१५ × ·६०३२ × ·६६५६
= ·६४२२ या ·४२०१
∵ जब क्रान्ति उत्तर होगी तब नतांश ५०° ३' होगा,
और जब क्रान्ति दक्षिण होगी तब नतांश ६५° ६' होगा।
पहली दशा में १२ अंगुल शंकु की छाया = १२ स्परे ५०° ३'
= १२ × १·१९४०
= १४·३२८ अंगुल
दूसरी दशा में, छाया = १२ × स्परे ६५° ६'
= १२ × २·१५६४
= २५·६१३ अंगुल