सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार २८७
फल = १२ × पलभा × अग्राज्या / ७२ + पलभा २
= १२ × ५.६८ × ६८५ / १०४.२६
= ६४४
∴ कोण शंकु = √करणी + फल २ ± फल
= √६८२२५२४ + ४१४७३६ ± ६४४
= √७२३७२६० ± ६४४
= २६६० ± ६४४
= ३३३४' या २०४६'
इसलिए जब क्रान्ति उत्तर होगी तब कोण शंकु ३३३४' और जब क्रान्ति
दक्षिण होगी तब कोण शंकु २०४६' होगी ।
यह बतलाया गया है कि कोण शंकु नतांश की कोटिज्या अथवा उन्नतांश
की ज्या को कहते हैं इसलिए यदि नतांश या उन्नतांश जानना हो तो कोण शंकु का
धनु बनाना होगा ।
यहाँ, कोण शंकु = उन्नतांश की ज्या = ३३३४'
∴ उन्नतांश = ७५° ५७'
∴ नतांश = ९०° - ७५° ५७' = १४° ३'
जब क्रान्ति दक्षिण होगी तब
उन्नतांश की ज्या = २०४६'
∴ उन्नतांश = ३६° ३२'
और नतांश = ९०° - ३६° ३२' = ५३° २८'
जब सूर्य की क्रान्ति उत्तर होगी तब,
दृग्ज्या = √त्रिज्या २ - कोण शंकु २
= √३४३८ २ - ३३३४ २
= √(३४३८ + ३३३४) (३४३८ - ३३३४)
= √६७७२ × १०४
= ८३६ कला
परन्तु दृग्ज्या = नतांश की ज्या
= ८३६'
∴ नतांश = १३° ५६'