सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार ३७७
∵ भुज = कर्णवृत्ताग्रा + पलभा
यहाँ कर्णवृत्ताग्रा में पलभा जोड़ने से भुज आता है ।
∵ जब सूर्य की क्रान्ति दक्षिण होती है तब कर्णवृत्ताग्रा में पलभा सदैव
जोड़ना पड़ता है ।
चित्र ५८
चित्र परिचय
उ ध ख व प द = यामोत्तर वृत्त उ = उत्तर विन्दु
ध = उत्तरी आकाशीय ध्रुव ख = खस्वस्तिक
द = दक्षिण विन्दु पू = पूर्व विन्दु
ख पू = सम मंडल व पू = विषुवद्वृत्त
अ प = सूर्य का अहोरात्र वृत्त जब क्रान्ति दक्षिण हो
अ = उदय विन्दु र = सूर्य का इष्ट स्थान
ख र आ = सूर्य का ऊर्ध्व वृत्त उ अ = सूर्य का उदयकालिक दिगंश
उ आ = सूर्य का इष्टकालिक दिगंश अ पू = उदयकालिक अग्रा
आ पू = इष्टकालिक अग्रा ख ध अ = सूर्य का उदयकालिक नत काल
∠ ख ध र = सूर्य का इष्टकालिक नत काल
ख र = सूर्य का नतांश; आ र = सूर्य का उन्नतांश