सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकार २७५
परन्तु दिगंश अग्रा का, ध्रुवांतर क्रान्ति का और लम्बांश अक्षांश का पूरक है,
इसलिए
ज्या (अग्रा) = $\frac{ज्या (क्रान्ति) - कोज्या (नतांश) \times ज्या (अक्षांश)}{ज्या नतांश \times कोज्या अक्षांश}$ (ग)
= $\frac{ज्या (क्रान्ति)}{ज्या (नतांश) \times कोज्या (अक्षांश)} - कोटि स्पर्शरेखा (नतांश) \times$
स्पर्श रेखा (अक्षांश) (घ)
परन्तु स्पर्शरेखा (अक्षांश) = $\frac{पलभा}{१२}$
कोटि स्पर्शरेखा (नतांश) = $\frac{१२}{छाया}$
ज्या (नतांश) = $\frac{छाया}{छायाकर्ण}$
$\therefore$ ज्या (अग्रा) = $\frac{ज्या (क्रान्ति)}{कोज्या (अक्षांश)} \times \frac{छायाकर्ण}{छाया} - \frac{१२}{छाया} \times \frac{पलभा}{१२}$
= $\frac{१}{छाया} \frac{क्रान्ति ज्या \times छायाकर्ण}{अक्षांश कोटिज्या} - पलभा \right}$ (६)
$\therefore$ छाया $\times$ इष्टकालिक अग्रा ज्या = कर्ण वृत्ताग्रा - पलभा
[देखो समीकरण (४)]
परन्तु छाया $\times$ इष्टकालिक अग्रा ज्या = इष्टकालिक छाया का भुज, क्योंकि
चित्र ४६ में $\angle$ स श पू या $\angle$ छ श भ इष्टकालिक अग्रा है जिसकी ज्या = $\frac{छ भ}{छ श}$
इसलिए छाया $\times$ इष्टकालिक अग्राज्या = श छ $\times \frac{छ भ}{छ श}$
$\therefore$ भुज = कर्ण वृत्ताग्रा - पलभा
इस चित्र में सूर्य सममंडल से उत्तर है इसलिए भुज दक्षिण होगा । यदि
सूर्य सममंडल के दक्षिण जैसे रा पर हो तो गोलीय त्रिभुज ध ख रा में
कोज्या $\angle$ ध ख रा = $\frac{कोज्या (ध रा) - कोज्या (ख रा) \times कोज्या (ध ख)}{ज्या (ख रा) \times ज्या (ध ख)}$