सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 296, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 296

त्रिप्रश्नाधिकार २७३
समीकरण (३) से अग्राज्या अर्थात् उदय या अस्तकालिक सूर्य की अग्रा की
ज्या का मान तथा अग्रा सुगमतापूर्वक निकल सकते हैं इसलिए यह अच्छा है ।
इस तरह
क्रान्तिज्या
कर्णवृत्ताग्रा = ————————— × इष्ट छायाकर्ण (४)
अक्षांश कोटिज्या
कर्ण वृत्ताग्रा में पलभा के किस समय जोड़ने या घटाने से छाया का भुज
ज्ञात होता है यह चित्र ४५, ४६ से स्पष्ट है । जब सूर्य दक्षिण गोल में होगा अर्थात्
जब सूर्य की क्रान्ति दक्षिण होगी तब कर्ण वृत्ताग्रा में पलभा सदैव जोड़ी जायगी
और योगफल उत्तर भुज होगा क्योंकि ऐसी दशा में छाया की नोक सदैव
विषुवद्वृत्ताग्रा रेखा से उत्तर होती है (देखो चित्र ४५), यदि सूर्य उत्तर गोल में हुआ
अर्थात् क्रान्ति उत्तर हुई तो जब तक सूर्य सममंडल से उत्तर रहेगा तब तक छाया
पूर्व पच्छिम रेखा से दखिन रहेगी इसलिए कर्ण-वृत्ताग्रा पलभा से बड़ी होगी ।
ऐसी दशा में कर्ण वृत्ताग्रा से पलभा घटाने पर भुज ज्ञात होगा (देखो चित्र ४६) ।
परन्तु यदि सूर्य सममंडल से दखिन हुआ तो छाया पूर्व पच्छिम रेखा और
विषुवद्वाग्रा रेखा के बीच में रहेगी । ऐसी दशा में पलभा कर्ण वृत्ताग्रा से बड़ी
होगी और पहले से दूसरी को घटाना पड़ेगा । २३-२४ श्लोकों का सार यह है :-
कर्णवृत्ताग्रा ± पलभा = भुज (५)
इसमें धनात्मक चिह्न उस समय लिया जायगा जब सूर्य की क्रान्ति दक्षिण
होगी अर्थात् जब सूर्य सायन तुला आदि ६ राशियों में रहेगा और ऋणात्मक चिह्न
उस समय लिया जायगा जब सूर्य की क्रान्ति उत्तर होगी अर्थात् जब सूर्य सायन
मेषादि ६ राशियों में रहेगा । पिछली दशा में यदि छाया पूर्व पच्छिम रेखा से
दखिन होगी तो भुज दक्षिण में होगा और यदि छाया पूर्व पच्छिम रेखा से उत्तर
होगी तो भुज उत्तर और पलभा से कर्ण वृत्ताग्रा को घटाना पड़ेगा ।
आजकल गोलीय त्रिकोणमिति के नियमों के अनुसार समीकरण (५) इस
प्रकार निश्चय किया जाता है :-
त्रिभुज ध ख र एक गोलीय त्रिभुज है, इसलिए*
कोज्या (ध र) - कोज्या (ख र) × कोज्या (ध ख)
कोज्या ध ख र = ———————————————————————————— (क)
ज्या (ख र) × ज्या (ध ख)
कोज्या (ध्रुवांतर) - कोज्या (नतांश) × कोज्या लम्बांश
अथवा कोज्या (दिगंश) = ———————————————————————————————— (ख)
ज्या (नतांश) × ज्या (लम्बांश)
*देखो टाडहंटर और लेथेम की गोलीय त्रिकोणमिति पृष्ठ २१ ।
१८