सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६४ सूर्य-सिद्धान्त
इस रीति से पलभा का मान निकालने में बहुत गुणा भाग करना पड़ता है ।
इसलिए यदि स्पर्शरेखाओं की सारिणी बना ली जाय तो यह काम सहज ही हो
सकता है क्योंकि अक्षांश और लम्बांश पूरक कोण हैं इसलिए
अक्ष ज्या / लम्ब ज्या = अक्षांश स्पर्शरेखा,
पलभा = १२ × अक्षांश स्पर्शरेखा (२)
यही बात पृष्ठ २०५ में भी दिखलायी गयी है ।
उदाहरण—प्रयाग का अक्षांश २५° २५' है तो प्रयाग की पलभा क्या
होगी ?
(१) सूर्य-सिद्धान्त की रीति से
अक्षज्या = २५° २५' की ज्या
= १४७४'
∴ लम्बज्या = √ त्रिज्या२ - अक्षज्या२
= √ ३४३८२ - १४७४२
= √ (३४३८ + १४७४) (३४३८ - १४७४)
= √ ४९१२ × १६६४
= ३१०६'
पलभा = (अक्षज्या × १२) / लम्बज्या
= (१४७४ × १२) / ३१०६
= ५.६६ अंगुल
(२) नवीन रीति से—
पलभा = १२ × अक्षांश स्पर्शरेखा
= १२ × स्परे* २५° २५'
= १२ × ०.४७५२ अंगुल
= ५.७०२४ अंगुल
= ५.७ अंगुल
- स्पर्शरेखा की जगह सरलता के लिए स्परे लिखा गया है जैसे कोटिज्या
के लिए कोज्या लिखा जाता है ।