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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२४४ सूर्य-सिद्धान्त
चित्र ५३
सीध में काम कर रहा है, ध धा लट्टू के अक्ष की रेखा है जिसका एक सिरा ध भूतल
पर लगा हुआ घूम रहा है और दूसरा सिरा धा ध क लम्ब रेखा से कुछ हटा हुआ
इसी की परिक्रमा कर रहा है । जब तक लट्टू की गति तीव्र रहती है तब तक यह
इसी भाँति भूतल की ओर प्रायः एक सा झुका हुआ क ध लम्ब की परिक्रमा करता
रहता है । क ध रेखा के चारों ओर एक परिक्रमा जितने समय में होती है उतने
समय में लट्टू ध धा अक्ष पर नहीं मालूम कितनी बार घूम जाता है । इसी प्रकार
पृथ्वी अपने अक्ष पर २४ घंटे में एक बार घूमती हुई क्रान्तिवृत्तीय अक्ष की,
जिसकी तुलना ध क लम्ब रेखा से हो सकती है, कोई २५००० वर्ष में एक परिक्रमा