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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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२३२ सूर्य-सिद्धान्त
ओर लौटने लगा और धीरे-धीरे वसंत सम्पात के साथ हो गया । इसके पश्चात् वसंत
सम्पात से पच्छिम की ओर जाने लगा और २७ अंश जाकर फिर वसंत सम्पात की
ओर लौटा और धीरे-धीरे वसंत सम्पात के पास फिर पहुँच गया । इस क्रम को एक
पूर्ण आंदोलन (oscillation) कहते हैं। ऐसे ऐसे ६०० आंदोलन एक महायुग में
अर्थात् ४३,२०,००० सौर वर्षों में होते हैं । इसलिए एक आंदोलन ७२०० सौर वर्षों
में तथा चौथाई आंदोलन अथवा २७° की गति १८०० सौर वर्षों में होती है ।

चित्र ४६

यह जानने के लिए कि अश्विनी का आदि बिन्दु वसंत सम्पात से किस समय
कितनी दूर है अर्थात् अयनांश क्या है, ६-१० श्लोकों में कहे गये नियम को काम
में लाना चाहिए जो एक उदाहरण से स्पष्ट हो जायगा ।
मान लो १६८२ वि० का अयनांश जानना है ।
सृष्टि के आरंभ से वर्तमान कलियुग के आरंभ तक १,९५,५८,८०,०००
सौर वर्ष बीते* जिसमें ७२०० वर्षों में एक आंदोलन के हिसाब से २,७१,६५०
आंदोलन पूरे हो गये इसलिए कलियुग के आरंभ में नये आंदोलन का आरंभ हुआ ।
इसलिए अयनांश जानने के लिए कलियुगादि अहर्गण से ही काम लेने में सुविधा

  • देखो मध्यमाधिकार विज्ञान भाष्य