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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 838 में से

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पृष्ठ 207

१८४ सूर्य-सिद्धान्त
परन्तु < र प गु + < र गु प = < रा र गु = शीघ्र केन्द्र
∵ स्परे (र प गु - र गु प) / २ = (र गु - र प) / (र गु + र प) स्परे (शीघ्र केन्द्र) / २
जिससे र प गु - र गु प ज्ञात हो सकता है । और < र गु प + < र प गु
ज्ञात ही है; इसलिए इन दोनों को जोड़कर आधा कर देने से र प गु कोण जाना जा
सकता है । यही कोण वृहस्पति और सूर्य के बीच का कोण है जो पृथ्वी से देख पड़ता
है । इसी को इनान्तर कहते हैं क्योंकि इन सूर्य का पर्याय है ।
पृथ्वी से गुरु की दूरी गु प जिसे शीघ्र कर्ण कहते हैं त्रिकोणमिति के अनुसार
इस प्रकार जान सकते हैं :-
गु प / ज्या < प र गु = गु र / ज्या < र प गु
परन्तु ज्या प र गु = ज्या रा र गु = ज्या शीघ्र केन्द्र
∵ शीघ्र कर्ण = ज्या शीघ्र केन्द्र × ग्रह का मंद कर्ण × १ / ज्या इनान्तर (३)
यह इनान्तर और शीघ्र कर्ण क्रान्तिवृत्तीय धरातल के हैं अर्थात् उस दशा के
हैं यदि ग्रह क्रान्तिवृत्त में देख पड़ता परन्तु यथार्थ में ग्रह कुछ उत्तर या दक्षिण
रहता है । इसलिए शीघ्र कर्ण को यदि ग्रह के इष्टकालिक शर की कोटिज्या से भाग
दे दिया जाय तो यथार्थ शीघ्र कर्ण ज्ञात हो जायगा । इसी प्रकार क्रान्तिवृत्तीय
इनान्तर में भी संस्कार करने से यथार्थ इनान्तर जाना जाता है । चित्र ३५ से जो
गाडफ्रे की 'एस्ट्रोनोमी' पृष्ठ २७४ के अनुसार है यह सब बातें एकसाथ ही स्पष्ट
होती हैं—
क ख क्रान्तिवृत्तीय धरातल है, जिसमें पृथ्वी की कक्षा अर्थात् क्रान्तिवृत्त
प च छ है । कक्षावृत्त पा ग पी है, जो क्रांतिवृत्तीय धरातल को पा पी बिन्दुओं पर
काटता है । पा उत्तर पात और पी दक्षिण पात हैं । र, प और ग क्रम से सूर्य, पृथ्वी
और ग्रह के यथार्थ स्थान हैं; ग से ग गा क्रान्तिवृत्तीय धरातल पर लम्ब गिराया गया
है; व वसंत संपात विन्दु है; < ग र गा और व र गा ग्रह के सूर्य केन्द्रीय शर और
भोगांश (Longitude) हैं । < ग प गा और < वा प गा ग्रह के भूकेन्द्रीय शर और
भोगांश हैं । प वा र व समानान्तर हैं । < व र प सूर्यकेन्द्रीय पृथ्वी का भोगांश है;
इसलिए < व र प + १८० भूकेन्द्रीय सूर्य का भोगांश है । र प गा त्रिभुज चित्र ३४ के
त्रिभुज र प गु से मिलता है । प गा ग्रह का क्रान्तिवृत्तीय शीघ्र कर्ण और < र प गा
क्रान्तिवृत्तीय इनान्तर है; प ग यथार्थ शीघ्रकर्ण और < र प ग यथार्थ इनान्तर है ।