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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 199

१७६ सूर्य-सिद्धान्त
$=\frac{१}{च} (\frac{च^२}{२}+\frac{च^४}{८}+\frac{च^३}{१६}+......)$
$=\frac{च}{२}+\frac{च^३}{८}+\frac{च^५}{१६}+......$
$प^२ =(\frac{च}{२}+\frac{च^३}{८}+\frac{च^५}{१६})^२$
$=\frac{च^२}{४}+\frac{च^४}{८}+\frac{५च^६}{६४}+......$
$प^३ =(\frac{च}{२}+\frac{च^३}{८}+\frac{च^५}{१६})(\frac{च^२}{४}+\frac{च^४}{८}+\frac{५च^६}{६४})$
$=\frac{च^३}{८}+\frac{३च^५}{३२}+\frac{\overline{\xi}च^७}{१२८}+......$
$प^४ =(\frac{च^२}{४}+\frac{च^४}{८}+\frac{५}{६४}च^६)^२$
$=\frac{च^४}{१६}+\frac{च^६}{१६}+......$
$=प^५ (\frac{च^४}{१६}+\frac{च^६}{१६})(\frac{च}{२}+\frac{च^३}{८}+\frac{च^५}{१६})$
$=\frac{च^५}{३२}+.........$
अब समीकरण (च) में प, $प^२$, $प^३$ इत्यादि तथा उ, ज्या उ, ज्या २ उ
इत्यादि के विस्तृत मान उत्थापन किये जायं तो इसका रूप यह होगा :—
स$=म+(च-\frac{च^३}{८}+\frac{च^५}{१६२}) ज्याम +(\frac{च^२}{२}-\frac{च^५}{६}+\frac{च^६}{४८}) ज्या २ म$
$+(\frac{३च^३}{८}-\frac{२७च^५}{१२८}) ज्या ३ म$
$+(\frac{च^४}{३}-\frac{४च^६}{१५}) ज्या ४ म +\frac{१२५च^५}{३८४} ज्या ५ म +$
$+२ { (\frac{च}{२}+\frac{च^५}{१६}) [(१-\frac{च^२}{८}+\frac{च^४}{१६२}) ज्या म$
$+(\frac{च}{२}-\frac{च^२}{६}+\frac{च^५}{४८}) ज्या २ म$