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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 182, कुल 838 में से

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स्पष्टाधिकार १५६
' उदाहरण—सूर्य और गुरु की स्पष्ट दैनिक गति (१६७६ वि० की वसंत
पंचमी की अर्द्धरात्रि को) निकालना ।
सूर्य की मध्यम दैनिक गति ५६' ८" है । इसलिए समीकरण (४) के अनुसार
[देखो उदा० १] सूर्य की स्पष्ट दैनिक गति
= ५६' ८" ± (८३३ / २१६००) × (२१० / २२५) × ५६' ८"
(यहाँ मन्द केन्द्र दूसरे पद में है इसलिए धन चिह्न लेने से)
= ५६' ८" + (८३३ / २१६००) × (२१० / २२५) × ५६' ८"
= ५६' ८" + २' ७".७
= ६१' १६" स्वल्पान्तर से
गुरु की मध्यम दैनिक गति
= ४' ५६"
गुरु की मन्द स्पष्ट गति
= ४' ५६" ± (१६४८ / २१६००) × (१६१ / २२५) × ४' ५६"
यहाँ मंद केन्द्र चौथे पद में है इसलिए ऋण चिह्न लेना चाहिए ।
∴ गुरु की मंद स्पष्ट गति
= ४' ५६" - (१६४८ / २१६००) × (१६१ / २२५) × ५'
= ४' ५६" - २५"
= ४' ३४"
गुरु के शीघ्रोच्च की गति = सूर्य की मध्यम गति = ५६' ८" । शीघ्र कर्ण = ३६०८
इसलिए इन सब मानों को समीकरण (५) में उत्थापन करने से और
धनात्मक चिह्न लेने से क्योंकि शीघ्रकर्ण त्रिज्या से अधिक है,
गुरु की स्पष्ट गति
= ४' ३४" + ((५६' ८" - ४' ३४") (३६०८ - ३४३८)) / ३६०८
= ४' ३४" + (५४' ३४" × १७०) / ३६०८
= ४' ३४" + २' ३४"
= ७' ८"