सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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२, ३, ४, इत्यादि बिन्दुओं पर घड़ी की सुइयां जिस दिशा में चलती हैं उसके
प्रतिकूल दिशा में पृथ्वी जाती है। चलने की दिशा तीर की दिशा से जानी जा
सकती है। पृथ्वी की दैनिक गति विषम होने से भूकक्षा के विन्दु असमान अंतर पर
दिखाये गये हैं।
सबसे छोटा वृत्त बुध ग्रह की कक्षा है। मान लीजिये कि बुध ब₁ से चलना
आरंभ करता है और अपनी कक्षा में २, ३, ४ इत्यादि बिन्दुओं पर घड़ी की प्रतिकूल
दिशा में तथा सूर्य निवासियों को मेष, वृष, मिथुन इत्यादि राशियों में जाता हुआ
दिखाई देता है। चित्र में ब₁ वहाँ लिखा है जहाँ बुध उस समय है जब कि पृथ्वी प₁
पर है। जब बुध बिन्दु २ पर जाता है तब पृथ्वी अपनी कक्षा में विन्दु २ पर जाती
है। जब बुध अपनी कक्षा में विन्दु २ से विन्दु ३ पर जाता है तब पृथ्वी अपनी कक्षा
में विन्दु २ में विन्दु ३ पर जाती है। इसी तरह और विन्दुओं के लिये भी समझना
चाहिये, जैसे जब बुध अपनी कक्षा में विन्दु ७ पर होता है तब पृथ्वी अपनी कक्षा
में विन्दु ७ पर रहती है, इत्यादि। यदि यह देखना हो कि पृथ्वी से बुध किस दिशा
में राशि चक्र पर दिखाई देगा तो बुध और पृथ्वी उस समय जहाँ हों, उन विन्दुओं
को मिलाकर राशि-चक्र तक ले जाइये। जहाँ यह रेखा पहुँचेगी वहीं बुध का स्थान
होगा। चित्र की सरलता के लिये पृथ्वी और बुध को मिलानेवाली रेखाएँ नहीं
दिखाई गई हैं परंतु बुध से राशि चक्र तक यह कटी रेखाओं से प्रकट की गयी हैं।
जैसे जब पृथ्वी प₁ और बुध ब₁ विन्दुओं पर होते हैं तब प₂, ब₁ का मिलाने वाली
रेखा राशि चक्र में १ विन्दु कर पहुँचती है अर्थात् पृथ्वी निवासियों को बुध राशि-
चक्र के विंदु १ पर अथवा कुंभ राशि के अन्त में दिखाई पड़ेगा। जब पृथ्वी प₂
पर पहुँचती है तब बुध ब₂ पर पहुँचता है और राशिचक्र में विन्दु २ पर अथवा
मीन राशि में दिखाई देता है और प₃ (अर्थात् जब पृथ्वी अपनी कक्षा में विन्दु ३
पर होती है) से बुध ब₃ पर होने के कारण राशिचक्र में विन्दु ३ पर मीन के अन्त में
दिखाई देगा। जब बुध अपनी कक्षा में ४ पर होगा तब पृथ्वी भी अपनी कक्षा में ४
पर होगी और पृथ्वी निवासियों को बुध राशि-चक्र में विन्दु ४ पर अर्थात् ३ से कुछ
ही आगे दिखाई पड़ेगा। जब बुध अपनी कक्षा में १ से २ तक आया तब पृथ्वी भी
१ से २ पर अपनी कक्षा में आयी और हम लोगों को बुध राशि चक्र में कुंभ से
मीन में जाता हुआ दिखाई पड़ा। जब बुध २ से ३ पर अपनी कक्षा में गया
तब पृथ्वी भी २ से ३ पर अपनी कक्षा में गयी और यहाँ के निवासियों को बुध
राशि चक्र में २ से ३ तक मीन राशि में आगे जाता हुआ दीख पड़ा। इस बार बुध
राशि चक्र मे उतना आगे नहीं बढ़ा जितना पहले बढ़ा था अर्थात् बुध की चाल