सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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सिद्ध हो सकती है, जो पीछे दी जायगी। इस जगह साधारण गणित के ही आधार
पर कुछ विस्तार के साथ सिद्ध की जाती है । १
मान लो कि 'स' एक स्थिर बिन्दु है और किसी वस्तु का कोई कण स के
चारों ओर घूमता हुआ क ख ग घ च बहुभुज क्षेत्र बना रहा है और क ख, ग घ,
या घ च भुज समान काल में अथवा १ पल में चलता है । यह भी मान लो कि इन
भुजों के मान भिन्न-भिन्न हैं और और जब तक कण किसी एक भुज पर रहता है
तब तक उसकी गति एकरूप (uniform) रहती है । स क ख, स ख ग, स ग घ,
स घ च त्रिभुजों के क्षेत्रफल भी समान समझ लेने चाहिये ।
अब यह प्रत्यक्ष है कि समान काल में वह कण स के चारों ओर घूमता हुआ
समान क्षेत्रफल बनाता है । गति के पहले नियम के अनुसार जब तक कण बहुभुज
चित्र २०
१. यह युक्ति Heroes of Science : Astronomers के पृष्ठ १७३—
१७५ के आधार पर है ।