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सर्वकोश
सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)

Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary

कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished256 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 256 में से

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पृष्ठ 74

ाद्" -> wait!
Let's look at the letters:
यु (yu)
ग्म (gma)
There is a हलन्त or something?
Look at: "युग्माद्"?
No! There is an आ-कार!
यु (yu) - ग्म (gma) - ा (ā) - द् (d) -> युग्माद् (yugmād)!
Wait! Let's re-read:
यु - ग्म - ा - द् = युग्माद्!
Yes! "समेताज्जग्राह युग्माद् युगपद् द्वयं सः ।"
Wait, "समेतात् ग्राह युग्माद् युगपद् द्वयं सः" -> समेतात् (from the united couple) + जग्राह (he took) + युग्मात् (from the pair) + युगपत् (simultaneously) + द्वयं (the two) + सः (he)!
Yes! "युग्माद् युगपद् द्वयं सः ।"
Look at the Hindi translation:
"प्रगाढ़ प्रेम के कारण परस्पर मिले हुये दोनों पति-पत्नी से भीमदेव ने एक साथ दो उपहार ग्रहण किये—"
"मिले हुये दोनों पति-पत्नी से" = समेताद् युग्मात्!
"एक साथ" = युगपत्!
"दो उपहार" = द्वयम्!
"ग्रहण किये" = जग्राह!
"भीमदेव ने ... सः" = सः!
Brilliant! So it is definitely:
`रसा