सुर्जन चरित महाकाव्यम् (कवि चन्द्रशेखर - बूँदी हाड़ा चौहान राजवंश शौर्य इतिहास सटीक)
Surjana Charita Mahakavya of Chandrashekhara with Commentary
कवि चन्द्रशेखर (सम्पादक: डॉ. चन्द्रधर शर्मा) द्वारा
पृष्ठ 189, कुल 256 में से
संदर्भ में पढ़ेंदयितस्तु सन्ततमभूत् कथापरः ।"
Wait, is it "वधूर्दयितस्तु" or "वधूर्वदयितस्तु"?
Look at the word: "वधूर्दयितस्तु" - wait, there is an extra letter or repha:
व - धू - र् - द - यि - त - स्तु
Wait, look at image line 27:
"प्रतिवाचमीरयतु वा न वा वधूर्दयितस्तु सन्ततमभूत् कथापरः ।"
Wait, look at "वधूर्दयितस्तु":
There is व, धू with repha on... wait, on the next letter?
Let's zoom in: "व धू र्द यि त स्तु" -> yes, "वधूर्दयितस्तु"!
Next line of verse 82 (line 28):
"अदस्रीयलोचनयुगं विलोकयन् वचनश्रुतौ सुचिरमुत्तरङ्गितम् ॥८२॥"
Wait, "अदस्रीयलोचनयुगं" or "अदसीयलोचनयुगं"?
Look at line 28:
"अदसीयलोचनयुगं विलोकयन् वचनश्रुतौ सुचिरमुत्तरङ्गितम् ॥८२॥"
Wait, let's look at the first word:
अ - द - सी - य - लो - च - न - यु - गं
Yes, "अदसीय