सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा
DevanagariHindipublished131 पृष्ठ
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भगति वछल सदा किरपाल ॥
अनाथ नाथ गोबिंद गुपाल ॥
सरब घटा करत प्रतिपाल ॥
आदि पुरख कारण करतार ॥
भगत जना के प्रान अधार ॥
जो जो जपै सु होइ पुनीत ॥
भगति भाइ लावै मन हीत ॥
हम निरगुनीआर नीच अजान ॥
नानक तुमरी सरनि पुरख भगवान ॥७॥
सरब बैकुंठ मुकति मोख पाड़े ॥
इेक निमख हरि के गुन गाड़े ॥
अनिक राज भोग बडिआई ॥
हरि के नाम की कथा मनि भाई ॥
बहु भोजन कापर संगीत ॥
रसना जपती हरि हरि नीत ॥
भली सु करनी सोभा धनवंत ॥