सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)
Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary
श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा
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सरब निरंतरि इको देखु ॥
कहु नानक जा कै मसतकि लेखु ॥७॥
इको जपि इको सालाहि ॥
इकु सिमरि इको मन आहि ॥
इकस के गुन गाउ अनन्त ॥
मनि तनि जापि इक भगवंत ॥
इको इकु इकु हरि आपि ॥
पूरन पूरि रहिआ प्रभु बिआपि ॥
अनिक बिसथार इक ते भए ॥
इकु अराधि पराछत गए ॥
मन तन अंतरि इकु प्रभु राता ॥
गुर प्रसादि नानक इकु जाता ॥८॥१६॥
सलोकु ॥
फिरत फिरत प्रभ आइआ परिआ तउ
सरनाइ ॥