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सर्वकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

DevanagariHindipublished131 पृष्ठ

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अनिक उपाव न छूटनहारे ॥
सिंम्रिति सासत बेद बीचारे ॥
हरि की भगति करहु मनु लाइ ॥
मनि बंछत नानक फल पाइ ॥४॥
संगि न चालसि तेरै धना ॥
तूं किआ लपटावहि मूरख मना ॥
सुत मीत कुटंब अरु बनिता ॥
इन ते कहहु तुम कवन सनाथा ॥
राज रंग माइआ बिसथार ॥
इन ते कहहु कवन छुटकार ॥
असु हसती रथ असवारी ॥
झूठा डंफु झूठु पासारी ॥
जिनि दीए तिसु बुझै न बिगाना ॥
नामु बिसारि नानक पछुताना ॥५॥
गुर की मति तूं लेहि इिआने ॥
भगति बिना बहु डूबे सिआने ॥