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सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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खांसी और गले की बीमारियाँ

खांसी के कई कारण हैं। गले या फेफड़ों में खराबी होने से ज्यादातर खांसी होती है। कभी-कभी कलेजे की खराबी से भी खांसी होती है। खांसी दो प्रकार की होती है, सूखी और तर। कभी-कभी खांसी में खून भी आता है। कफ की खांसी में कफ को पकाकर सफाई कर डालना चाहिए। और सूखी खांसी में तर दवा देना चाहिए।

१—काकड़ा साँगी, कूट-पीसकर काली मिर्च के बराबर गोली पानी में बनाकर मुँह में रखने से कफ की खांसी आराम होती है।

२—छोटी पीपल चिलम में रखकर थुँआ पीने से पुरानी खांसी आराम होती है।

३—सरसों पीसकर शहद में चाटने से कफ की खांसी दूर होती है।

४—बहेड़ा पर घी चुपड़कर भूसल में भून लिया जाय। उसे मुँह में रखने से सब किस्म की खांसी आराम होती है।