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सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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सुगम विक्रिप्सा

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है । पर 'कुछ बुखार' जैसे निमोनिया में या सन्निपात में या दाह-
ष्वर में १०६ या १०७ डिग्री बुखार कुछ देर को होजाता है । पर
१०१ और १०५ डिग्री के भीतर बुखार ठहर जाय तो वह 'स्तर-
नाक' बात है । पुराने बुखारों में रात को ष्वर कम होजाता है ।

कुछ किसिम के बुखार शोक, आनन्द, जागने, थकने, भीगने,
जुकाम, नजले आदि से पैदा होजाते हैं । इन में पूरा आराम
करना चाहिए । और उनके कारणों को दूर करना चाहिए ।

बात के बुखार में- कांपना, कभी सदी कभी गर्मी लगना, होठ
और गला सूखना, नींद न आना, छाँक न आना, कंठज होना
आदि लक्षण होते हैं ।

पित्त के बुखार में तेज बुखार, पतला दस्त, नींद कम, उल्टी,
पसीना, मुँह का स्वाद कड़ुआ, जलन होना, प्यास ज्यादा, गला,
होठ और नाक का पक जाना आदि लक्षण होते हैं ।

कफ के बुखार में मन्दा बुखार, आलस, मुँह का स्वाद मीठा,
भूख नहीं, जी मिचलाना, नींद ज्यादा, जुकाम आदि लक्षण होते
हैं ।

१—करंजुआ के बीज की मींग १ पाव लेकर उसमें १ छटाँक
काली मिर्च मिलाकर चने-सी गोली पानी में बनाकर ताजे पानी
के साथ काम से लेने से सब प्रकार के बुखार को फायदा करती है ।

२—गिलोय, सोंठ और पीपलामूल एक-एक पैसा-भर का
काढ़ा सुबह-शाम पीने से वायु का और कफ का बुखार आराम
होता है ।