सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 222 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 167

मुगम चिकित्सा

१५०

सिर दर्द को फायदा करता है। खॉन्सी, फेफड़े का दर्द, छाती का दर्द इसके लगाने से जाता है।

श्रोलियम पाइरीथी—(अकरकरे का तेल) इसे तिला की भाँति काम में लाया जाता है।

श्रालियम कोरियरडर—(धनिये का तेल) मुजाक में, पेशाब की जलन में देते हैं। पेचिश को भी लाभ देता है। मात्रा एक-से-पाँच बूँद तक।

श्रालियम एली—(लहसन का तेल) गठिया पर मलने के लिए मुफ़ीद है। कान में डालने से बहरापन जाता है।

श्रालियम क्रेपसीसाई—(लाल मिरच का तेल) हँखे को और जिस जगह का पानी लगता हो उसके लिए मुफ़ीद है। मात्रा एक से पाँच बूँद तक।

श्रालियम ट्रिटीसी—(गेहूँ का तेल) इसे गिल्दी की बीमारियों में लगाते हैं। और बिवाई बन्द करने में फायदा मन्द है।

सत—

एक्सट्रू कट-एकोनाइट—(मीठे तेलिये का सत) पट्टे के दर्द में गुणकारी व चढ़े गुल्लार को उतारता है। दिल के परदे के भारी होजाने में, जलन्धर, तपेदिक, व फेफड़ों की सूजन, और फ्लुरिसी में मुफ़ीद है। मात्रा एक से दो ग्रेन तक।

एक्सट्रैक्ट एलोग—(एलवे का सत) दस्त लाने के घास्ते बच्चों के पेट पर लेप करते हैं। पुराने कृन्ज के लिए उम्दा दवा है। जिन स्त्रियों को मासिक-धर्म न होता हो या कम होता हो तो उसे खोलने को फौलाद के साथ एक सप्ताह पूर्व से देना चाहिए।