सुगम चिकित्सा
Sugam Chikitsa
आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा
स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)
पृष्ठ 156, कुल 222 में से
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चोट और श्रंक्स्मात
फौरन जख्म चीरकर खून निकाल दो या लोहे से दाग दो ।
जख्म को लाल मिर्च या सुर्मा पीसकर
पागल कुत्ता या सियार भर दो । और ऐसे बीमारों के जो अस्प-
ताल हैं, वहाँ रोगी को पहुँचा दो ।
बर्—जहाँ डंक सारे वहाँ नमक का पानी मलों, या कपूर का
तेल मलों ।
किसी जानवर का दांत या नाखून का जहर—पीपल, गूलार, नीम
या बड़ की छाल घिसकर लेप कर देने अच्छा हो जाता है ।
काम के नुसखे—
१—काले उर्द हुक्के में रखकर पीने से ह्रिचकी में आराम
होता है ।
२—पुरानी चलनी का चमड़ा जलाकर उसकी राख गुदा पर
छिड़कने से वृन्नों की काँच निकलना आराम होता है ।
३—नीम के पत्ते जलाकर राख पानी में घोलकर निथार लो,
पीछे पानी जलाकर खार बनालोगे । दो भाशे खाने से पथरी और
गुरदे का दर्द आराम होता है ।
४—टेसू के फूल पानी में झौटाकर पेड़ पर सेक करने से
पेशाब का घनद खुलता है ।
५—लहसुन को दूध में झौटाओ, जब खोआ होजाय तो घी
में भुनो, पीछे शहद मिलाकर अबलेह बनालोगे । सब प्रकार की वादी
और लकवे को फायदा करता है ।
६—इमली का चीन्ना भाड़ में भुनवाकर छिलका निकाल लो,