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सर्वकोश
सुगम चिकित्सा

सुगम चिकित्सा

Sugam Chikitsa

आचार्य चतुरसेन शास्त्री द्वारा

स्रोत: June 1939 First Edition · सस्ता साहित्य मण्डल, दिल्ली (Sasta Sahitya Mandal, Delhi) · 1939 (उद्गम)

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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सुगम चिकित्सा

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आतशक, कोढ़ और चमड़ी की सब बीमारियों पर फायदेमन्द है। वात रक्त की बीमारी, जिसमें घुटनों से नीचे और कोहिनियों से नीचे घाव होजाते हैं उसमें भी मुफ़ीद है। कण्ठमाला की बीमारी में भी यह फायदेमन्द है। बढ़ते-बढ़ाते इसकी मात्रा बीस बूँद तक की जा सकती है, पर खयाल रखना चाहिए कि यह दवा हज्म देर से होती है। जिन रोगियों का हाज्म खराब हो उन्हीं कम देना चाहिए। यह दवा खाली पेट नहीं देना चाहिए, बल्कि खाना खाने के एक या आधे घण्टे के पीछे देना चाहिए। यह दवा असाध्य कोढ़ को भी फायदा करनेवाली बताई जाती है। कोढ़ की शुरुआत में इसका उपयोग किया जाय तो जल्द फायदा होगा। यह तेल दूध में भी डालकर दिया जा सकता है। जबतक यह दवा सेवन की जाय, नमक, मिर्च, मसाला खटाई आदि बिल्कुल छोड़ देना चाहिए। धी-दूध मक्खन झबू खाय। गुड़ खाएड त्याग देना चाहिए। खयाल रखना चाहिए कि बढ़िया दुकान से खालिस तेल खरीदा जाय, क्योंकि अक्सर लोग मिलावट कर देते हैं।

सफेद दागों का एक अच्छा नुसखा यहाँ लिखते हैं। अगर रोग तीन साल से कम का होगा तो दो-तीन महीने में अवश्य अच्छा हो जायगा। गेरू, हल्दी, कवाव चीनी, बाबची चारों चीजें बराबर लेकर चूर्ण बनाओ। छः माशा दवा रात को मिट्टी के शकोरे में भिगोदी जाय। सुबह ऊपर का पानी नित्यारकर शहद छः माशा मिलाकर पीलिया जाय। बाद को गांठों पर लेप कर लिया जाय।