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सर्वकोश
सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

सुदामा चरित (महाकवि नरोत्तमदास - ब्रजभाषा काव्य एवं सान्वय सटीक)

Sudama Charit of Mahakavi Narottamdas with Commentary

महाकवि नरोत्तमदास द्वारा

DevanagariHindipublished108 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

१६ / सुदामा-चरित
था कि उसके पति और श्रीकृष्ण न एक साथ शिक्षा ग्रहण की थी और वे पर-
स्पर मित्र हैं। ‘सुदामा-चरित’ में स्वयं सुदामा अपनी पत्नी को यह सभी कुछ
बताते हैं। इससे कवि को सुदामा की दीन-हीन दशा का वर्णन करने, सुदामा-
पत्नी की मनोवैज्ञानिक स्थिति का उद्घाटन करने तथा सुदामा की त्यागमयी
मनोवृत्ति का विश्लेषण करने का अच्छा अवसर मिलता है। वह नाटकीय-पद्धति
में इन दोनों के चरित्र पर प्रकाश डालते हैं; दोनों के तर्क-वितर्क इस काव्य-रचना
में सरसता तथा कौतूहल का संचार करते हैं।
२. ‘श्रीमद्भागवत’ में सुदामा धन-प्राप्ति की इच्छा से नहीं, वरन् भगवान्
के दर्शनार्थ द्वारिका जाते हैं। वे पत्नी की बात ही रखना चाहते हैं, उससे सह-
मत नहीं होते हैं। ‘सुदामा-चरित’ सुदामा के ब्रह्मज्ञानी, विरक्त तथा त्यागी होते
हुए भी पत्नी की इच्छा से सहमत होकर द्वारिका जाते हैं और वहाँ से धन लाना
उनका उद्देश्य था। वे केवल दर्शनार्थ श्रीकृष्ण के पास नहीं जाते हैं। कवि ने इस
अन्तर के द्वारा सुदामा को एक साधारण मानव के रूप में चित्रित किया है, जो
अधिक स्वाभाविक है।
३. ‘श्रीमद्भागवत’ में सुदामा को जब श्रीकृष्ण प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं
देते हैं तो वे उससे प्रसन्न होते हैं; मार्ग में जाते हुए यह सोचते हैं कि धन माया
है, माया मनुष्य को प्रभु से दूर करती है। ‘सुदामा चरित’ के सुदामा-श्रीकृष्ण
से प्रत्यक्ष रूप में कुछ न पाकर कभी श्रीकृष्ण पर और कभी अपनी पत्नी पर
झुंझलाते हैं। वे श्रीकृष्ण को कोसते हैं। इस परिवर्तन से भी कवि ने सुदामा के
चरित्र को अधिक स्वाभाविक तथा मनोवैज्ञानिक बनाया है।
४. ‘श्रीमद्भागवत’ में सुदामा द्वारिका से लौटकर अपनी पत्नी का धन्य-
वाद नहीं करते हैं, वे सारे परिवर्तन के मूल में प्रभु की लीला को देखते हैं।
‘सुदामा-चरित’ में सुदामा घर लौटकर बड़ी कठिनाई से सारा परिवर्तन समझते
हैं और अपनी पत्नी का धन्यवाद करते हैं, क्योंकि उसी की प्रेरणा से वे द्वारिका
गए और उन्हें अपार धन-वैभव मिला। वस्तुतः कवि ने सुदामा को केवल भक्त
रूप में न लेकर मानव-रूप में चित्रित किया है, जिससे वह मानवीय संवेदनाओं
को जागृत कर सके।