श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिंदू धर्म-ग्रंथोंका संक्षिप्त परिचय
हिंदू धर्मके मूलभूत ग्रंथोंमें, महत्त्व और कालानुक्रमकी दृष्टिसे, वेद श्रेष्ठ
और आद्य ग्रंथ हैं, और संहिता, ब्राह्मण तथा उपनिषदोंका उन्हींमें समावेश किया
जाता है। यज्ञयागादिके कर्मकाण्ड और परमार्थ-विचारोंके ज्ञानकाण्ड, इन दोनोंका
मूल उक्त त्रयीमें है। तथापि ज्ञानकाण्डके मूलभूत आधार-ग्रंथ उपनिषद् हैं। हिंदू-
धर्मके सामाजिक व्यवहारोंका नियंत्रण स्मृतिग्रंथोंके द्वारा किया जाता है; परंतु
उनका मूल आधार गृह्यसूत्र हैं। गृह्यसूत्रोंके अतिरिक्त औरभी अनेक सूत्र-ग्रंथ
हैं; परंतु उनका संबंध धर्मव्यवहारोंसे नहीं है, बल्कि केवल विश्वके रहस्यका उद्-
घाटन करनेवाली विविध विचार-परंपराओंसे है। इन विविध विचार-परंपराओं-
कोही षड्दर्शन कहते हैं। गौतमके न्यायसूत्र, सांख्यसूत्र, वैशेषिकसूत्र, जैमिनीके
पूर्वमीमांसासूत्र, बादरायणके वेदान्त अथवा ब्रह्मसूत्र, पतंजलीके योगसूत्र इत्यादिका
षड्दर्शनमें समावेश होता है; परंतु षड्दर्शनके सिवाभी अन्य अनेक सूत्र-ग्रंथ हैं।
उन्हींमें पाणिनीसूत्र, शाण्डिल्यसूत्र, नारदसूत्र इत्यादिकी गणना होती है। प्राचीन
मूर्तिपूजारहित और निर्मल पारमार्थिक स्वरूपके वैदिक धर्ममें परिवर्तन होकर
उपास्य देवताओंको माननेकी प्रवृत्ति जारी होनेके बाद पुराणोंका जन्म हुआ।
महाभारत और रामायण पुराण नहीं, किंतु इतिहास हैं। पुराणोंमेंही गीताओंका
समावेश होता है। गीतारहस्य-ग्रंथमें इस विषयका प्रसंगानुसार ऊहापोह किया
गया है; परंतु पाठकोंको उसका एकत्र ज्ञान करा देनेके उद्देश्यसे तालिकाके रूपमें
निम्नलिखित जानकारी दी जाती है।
( १ ) वेद अथवा श्रुतिग्रंथ :-
वेद :- अथर्व, ऋग्वेद ।
संहिता :- ( ऋचाओंका अथवा मंत्रोंका संग्रह । कर्म अथवा यज्ञकांड )
तैत्तिरीय, मनु, वाजसनेयी, सूत ।
ब्राह्मण :- ( आरण्यक । कर्म अथवा यज्ञकांड ) आर्षेय, ऐतरेय, कौषिक,
कौषीतकी, तैत्तिरीय, शतपथ ।
उपनिषद् :- ( ज्ञानकांड) अमृतबिंदु, ईश ( ईशावास्य), ऐतरेय, कठ, केन,
कैवल्य, कौषीतकी ( कौ. ब्राह्मण ), गर्भ, गोपालतापनी, छांदोग्य, छुरिका,
जाबाल-संन्यास, तैत्तिरीय, ध्यानबिंदु, नारायणीय, नृसिंहोत्तरतापनीय,
प्रश्न, बृहदारण्यक, महानारायण, मांडूक्य, मुंडक ( मुंड ), मैन्नी ( मैत्रा-
यणी ), योगतत्त्व, रामतापनी, वज्रसूची, श्वेताश्वतर, सर्व ।
( २ ) शास्त्र :-
१. धर्मग्रंथ -- गृह्य-सूत्र, स्मृति-ग्रंथ ( मनु, याज्ञवल्क्य और हारीत ) ।